रांची: प्रदेश में अपराध का एक ऐसा नया और खतरनाक खेल शुरू हुआ है जिसने आम लोगों के साथ-साथ छोटे व्यवसायियों की नींद उड़ा दी है. अपराधियों का नेटवर्क अब सीधे उन लोगों को निशाना बना रहा है जो बैंकिंग सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने का काम करते हैं. विशेष रूप से सीएसपी संचालक अब अपराधियों के सॉफ्ट टारगेट बन गए हैं.

कैसे बुना जा रहा है रकम की ट्रांसफर का जाल:
डिजिटलाइजेशन के इस दौर में जहां गांव-गांव तक लोग अस्पताल, पढ़ाई और घरेलू खर्चों के लिए सीएसपी के जरिए पैसा भेजते हैं, वहीं अपराधी इसी व्यवस्था को अपनी ब्लैक मनी सफेद करने का जरिया बना रहे हैं. रंगदारी और अवैध वसूली से जुटाई गई बड़ी रकम को अपराधी एक साथ ट्रांसफर नहीं करते. इसके बजाय, गिरोह के गुर्गे आम ग्राहक बनकर अलग-अलग सीएसपी केंद्रों पर आते है. ये अपराधी पांच से बीस रुपये जैसी छोटी रकम लेकर आते हैं ताकि किसी को शक न हो. संचालक को लगता है कि कोई मजदूर या जरूरतमंद अपने घर पैसे भेज रहा है.
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अनजाने में फंसते संचालक:
जब पुलिस या साइबर सेल किसी संदिग्ध खाते की जांच करती है, तो ट्रेल सीधे उस सीएसपी दुकान तक पहुंचती है जहां से पैसा जमा किया गया था. सीसीटीवी फुटेज या रिकॉर्ड के अभाव में संचालक ही मुख्य संदिग्ध बन जाता है.

