नीति आयोग की बैठक में हेमंत सोरेन की हुंकार: विकसित भारत का सिर्फ कोयला-लोहा प्रदाता नहीं, बराबर का साझेदार बनेगा झारखंड

Ranchi: झारखंड देश के लिए केवल खनिज संपदा और कच्चे माल का स्रोत मात्र बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि वह ‘विकसित भारत-2047’...

Ranchi: झारखंड देश के लिए केवल खनिज संपदा और कच्चे माल का स्रोत मात्र बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि वह ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प में देश का एक सशक्त और बराबर का साझेदार बनने को तैयार है. नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देश के नीति-निर्माताओं के सामने राज्य के विकास का यह बुलंद और दूरदर्शी विजन प्रस्तुत किया. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि झारखंड ने अपने कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट के दम पर दशकों से देश की औद्योगिक प्रगति की नींव को मजबूत किया है. लेकिन इस प्रक्रिया में राज्य ने विस्थापन, पर्यावरण असंतुलन और नक्सलवाद जैसी गंभीर आंतरिक चुनौतियों का दंश भी झेला है. सोरेन ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है जब खनिज संपदा से होने वाली आय को सीधे तौर पर शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जोड़कर राज्य के मानव संसाधन को समृद्ध किया जाए. उन्होंने 2047 तक झारखंड को एक माइनिंग स्टेट की छवि से बाहर निकालकर ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’, ‘ग्रीन इकोनॉमी’ और ‘नॉलेज इकोनॉमी’ के रूप में स्थापित करने का अपना संकल्प दोहराया.

केंद्र से वित्तीय हक की मांग: 1.36 लाख करोड़ का कोयला बकाया और जल जीवन मिशन की राशि

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के विकास की गति को तेज करने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष झारखंड के वित्तीय अधिकारों और लंबित दावों को पूरी मजबूती से रखा. उन्होंने मुख्य रूप से दो बड़े वित्तीय मुद्दों पर केंद्र का ध्यान आकर्षित किया.कहा कि इन वित्तीय हकों के मिलने से झारखंड में उद्योग, शिक्षा, खेल और आधारभूत संरचना के क्षेत्रों में ऐतिहासिक बदलाव लाया जा सकता है.

  • कोयला कंपनियों पर बकाया: विभिन्न केंद्रीय कोयला कंपनियों पर झारखंड का 1.36 लाख करोड़ का विशाल बकाया है. मुख्यमंत्री ने इस राशि का भुगतान जल्द से जल्द करने की मांग की ताकि इसे राज्य के बुनियादी ढांचे के विकास में लगाया जा सके.
  • जल जीवन मिशनः राज्य में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के संकल्प को गति देने के लिए उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत केंद्र के पास लंबित ₹6,000 करोड़ की राशि तुरंत जारी करने का आग्रह किया.

शिक्षा और आंगनबाड़ी: बुनियादी ढांचे की कमी के बीच कुपोषण पर करारी चोट

भावी पीढ़ी के निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री ने राज्य की जमीनी हकीकत और सफलताओं दोनों का ब्योरा दिया. उन्होंने बताया कि राज्य में कुल 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से 15 हजार केंद्रों के पास अपना भवन नहीं है. इस बुनियादी कमी के बावजूद, राज्य सरकार ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और ‘सामार’  योजना के माध्यम से कुपोषण और बच्चों में स्टंटिंग (नाटापन) की समस्या में उल्लेखनीय कमी लाने में सफलता पाई है.

 सीएम ने बताई ये बातें, सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का किया जिक्र

  • बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए झारखंड सरकार हर बच्चे को प्रतिदिन एक अंडा उपलब्ध करा रही है. साथ ही, केंद्रीय मदद का इंतजार किए बिना राज्य अपने सीमित संसाधनों से 5 हजार नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण खुद कर रहा है.
  • शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य के ’80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ आज निजी स्कूलों को टक्कर दे रहे हैं. इन स्कूलों के गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चे अब आईआईटी , मेडिकल और देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में चयनित हो रहे हैं. मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से मांग की कि झारखंड में ‘पीएम श्री विद्यालयों’ और ‘केंद्रीय विद्यालयों’ की संख्या बढ़ाई जाए और विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं को एकीकृत कर इनका लाभ सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए.

युवाओं को हुनर और रोजगार: हर साल 1 लाख से अधिक को ट्रेनिंग

झारखंड के युवाओं को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने को लेकर राज्य सरकार बड़े पैमाने पर काम कर रही है. मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य हर वर्ष 1 लाख से अधिक युवाओं को आधुनिक प्रशिक्षण देकर रोजगार और स्व-रोजगार से जोड़ रहा है.

  • मुख्यमंत्री सारथी योजना: इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत अब तक 6.76 लाख युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षित किया जा चुका है.
  • बिरसा कौशल विकास कार्यक्रम: इसके तहत राज्य के अधिकांश ब्लॉकों (प्रखंडों) में अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं, ताकि ग्रामीण युवाओं को उनके घर के पास ही हुनरमंद बनाया जा सके.
  • फ्यूचर स्किल्स पर फोकस: राज्य सरकार केवल पारंपरिक रोजगार नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , इलेक्ट्रिक व्हीकल  और रोबोटिक्स जैसे अत्याधुनिक और भविष्य के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है.

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा विजन: ‘एआई-इनेबल्ड डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल’ और दवा दुकानें

  • झारखंड के सुदूर ग्रामीण इलाकों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘पंचायत स्तरीय दवा दुकान योजना’ की सफलता को साझा किया, जिसके तहत वर्तमान में 1,276 दवा दुकानें सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं. इससे ग्रामीणों को सस्ती और जरूरी दवाएं अपने गांव में ही मिल पा रही हैं.
  • स्वास्थ्य क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि झारखंड सरकार राज्य के नागरिकों के लिए एआइ विकसित करने की दिशा में काम कर रही है. इस तकनीक के माध्यम से लोगों की गंभीर बीमारियों की पहचान शुरुआती चरणों में ही हो सकेगी, जिससे समय पर और सटीक इलाज संभव हो पाएगा. इसके अलावा, सोरेन ने केंद्र सरकार से राज्य के मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाने और नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति की प्रक्रिया को तेज करने का आग्रह किया.

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खेल, कृषि और पर्यावरण: खेल यूनिवर्सिटी और 10 लाख पोषण वाटिकाएं

हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स और तीरंदाजी जैसे खेलों में झारखंड की देश-दुनिया में एक विशिष्ट पहचान रही है. इस पहचान को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए मुख्यमंत्री ने नीति आयोग के मंच से राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी तथा हॉकी एवं फुटबॉल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए केंद्रीय सहयोग की पुरजोर वकालत की. उन्होंने देश के खेल संघों की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया.

  • राज्य में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की जा चुकी हैं, जो ग्रामीण परिवारों की पोषण सुरक्षा सुनिश्चित कर रही हैं.
  • बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत लगभग 1.5 लाख एकड़ भूमि पर फलदार पौधे लगाए गए हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आमदनी भी बढ़ी है.

सहकारी संघवाद की सच्ची कसौटी

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नीति आयोग की बैठक में दिया गया यह संबोधन केवल मांगों की सूची नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मनिर्भरता और देश के विकास में उसकी बड़ी भूमिका का एक स्पष्ट दस्तावेज है. मुख्यमंत्री ने सीधे शब्दों में केंद्र को यह संदेश दे दिया है कि यदि देश को 2047 तक वास्तव में ‘विकसित’ बनाना है, तो झारखंड जैसे प्रचुर संसाधनों वाले राज्य को उसका वित्तीय हक और विशेष केंद्रीय सहयोग देना ही होगा.अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है कि वह सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करते हुए झारखंड की इन जायज मांगों पर कितनी जल्दी सकारात्मक कदम उठाती है.

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