Hazaribagh : झारखंड-बिहार सीमा क्षेत्र के महत्वपूर्ण चौपारण सामुदायिक अस्पताल में चिकित्सकों के बीच चल रहे विवाद ने अब मरीजों की चिंता बढ़ा दी है. अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और एक अन्य चिकित्सक के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मामला प्रशासन तक पहुंच गया है. गुरुवार को उपायुक्त के निर्देश पर अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचलाधिकारी अस्पताल पहुंचे तथा चिकित्सकों एवं कर्मियों से जानकारी लेकर मामले की पड़ताल की.
अस्पताल की आंतरिक कलह से प्रभावित हो रही स्वास्थ्य सेवाएं
अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद का असर अब स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है. मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में चिकित्सकों के बीच तनाव का माहौल होने से कार्य व्यवस्था प्रभावित हो रही है. कई बार मरीजों को आवश्यक जानकारी और समन्वित उपचार मिलने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मियों के बीच आपसी तालमेल बेहतर होना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा संबंध मरीजों की जान और स्वास्थ्य से है.

प्रशासनिक अधिकारियों ने लिया स्थिति का जायजा
गुरुवार को अनुमंडल पदाधिकारी जोहन टुडू, बीडीओ नितेश भास्कर एवं सीओ संजय यादव अस्पताल पहुंचे. अधिकारियों ने अस्पताल कर्मियों और चिकित्सकों से अलग-अलग बातचीत कर विवाद के कारणों और उसके प्रभावों की जानकारी ली. हालांकि निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. डी.एन. ठाकुर अस्पताल में मौजूद नहीं थे. बताया गया कि वे विभागीय बैठक में भाग लेने हजारीबाग गए हुए थे.
दोनों पक्षों के आरोपों से बढ़ा विवाद
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. डी.एन. ठाकुर ने आरोप लगाया कि संबंधित चिकित्सक नियमित रूप से समय का पालन नहीं करती हैं और उनके कार्य निष्पादन को लेकर शिकायतें मिलती रही हैं. उन्होंने वेतन कटौती को विभागीय नियमों के तहत की गई कार्रवाई बताया. वहीं दूसरी ओर डॉ. फरहाना महफूज ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है. उनका आरोप है कि बिना पर्याप्त कारण के वेतन काटा जाता है तथा बार-बार स्पष्टीकरण मांगकर मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
सीमा क्षेत्र के हजारों लोगों की जीवनरेखा है यह अस्पताल
चौपारण सामुदायिक अस्पताल झारखंड-बिहार सीमा क्षेत्र के साथ-साथ दनुआ घाटी क्षेत्र के लोगों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है. राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े इस इलाके में अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिनमें घायल लोगों को सबसे पहले इसी अस्पताल में लाया जाता है. इसके अलावा आसपास के सैकड़ों गांवों के गरीब और जरूरतमंद लोग प्राथमिक एवं आपात चिकित्सा सेवाओं के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं. ऐसे में चिकित्सकों के बीच बढ़ता विवाद आम लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है.
मरीजों की मांग-विवाद खत्म हो, सेवा बेहतर हो
अस्पताल पहुंचे कई मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि उन्हें किसी चिकित्सक या अधिकारी के विवाद से कोई मतलब नहीं है. उनकी प्राथमिकता बेहतर इलाज और समय पर चिकित्सा सुविधा है. लोगों ने प्रशासन से जल्द जांच पूरी कर विवाद का समाधान निकालने तथा अस्पताल की व्यवस्था को पटरी पर लाने की मांग की है.
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जानकारी जुटा रहा है. दोनों पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद अब क्षेत्रवासियों की निगाहें जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.
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