Newswave Desk: सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों के योगदान को लेकर अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि घर संभालने वाली महिलाओं को सिर्फ इसलिए कमतर नहीं आंका जा सकता, क्योंकि उन्हें किसी नौकरी की तरह वेतन नहीं मिलता.
अदालत ने कहा कि गृहिणियों का काम सिर्फ खाना बनाना या घर की देखभाल करना नहीं है, बल्कि वे परिवार और समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं. इसलिए दुर्घटना में किसी गृहिणी की मौत होने पर मुआवजा तय करते समय उनके योगदान को ध्यान में रखा जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गृहिणी की आर्थिक भूमिका का आकलन करते समय उनकी उम्र, शिक्षा, कौशल, पारिवारिक जिम्मेदारियां और आर्थिक स्थिति जैसे पहलुओं को देखा जाना चाहिए.

समय संतुलित और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाना जरूरी
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आय नहीं होने के आधार पर गृहिणियों को कम मुआवजा नहीं दिया जा सकता. मुआवजा तय करते समय संतुलित और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा करने पर जोर दिया और कहा कि पीड़ित परिवारों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए.
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