Chaibasa: बंदगांव प्रखंड के हुडंगदा गांव निवासी समाजसेवी अवनि कुमार महतो ने राज्य सरकार से मांग की है कि झारखंड की क्षेत्रीय भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए सभी विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कुड़मालि भाषा की पढ़ाई शुरू की जाए. उन्होंने कहा कि कुड़मालि भाषा झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान नहीं मिलने के कारण यह भाषा धीरे-धीरे उपेक्षित होती जा रही है.
बौद्धिक विकास बेहतर होता है: अवनि कुमार महतो
अवनि कुमार महतो ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास बेहतर होता है और वे अपनी संस्कृति, परंपरा तथा इतिहास से जुड़े रहते हैं. उन्होंने कहा कि कुड़मालि भाषा को प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा को पढ़-लिख सके और इसके संरक्षण में योगदान दे सके. उन्होंने सरकार से कुड़मालि भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति, पाठ्यपुस्तकों की व्यवस्था तथा भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष योजनाएं संचालित करने की मांग की.

बुद्धिजीवियों ने भी इस मांग का समर्थन किया
उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी समाज की पहचान होती है और इसके संरक्षण के बिना सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता. समाज के विभिन्न संगठनों एवं बुद्धिजीवियों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि कुड़मालि भाषा को शिक्षा व्यवस्था में स्थान मिलने से क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण को बल मिलेगा और विद्यार्थियों में अपनी संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ेगी.
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