जामताड़ा की धरती पर उगा ‘लाल सोना’, दुनिया का सबसे महंगा आम बना आकर्षण

Jamtara:झारखंड का जामताड़ा जिला एक बार फिर अपनी अलग पहचान बनाकर देश-दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है. जिले के कुंडहित...

Jamtara:झारखंड का जामताड़ा जिला एक बार फिर अपनी अलग पहचान बनाकर देश-दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है. जिले के कुंडहित प्रखंड अंतर्गत अंबा गांव के दो किसान भाइयों अरिंदम चक्रवर्ती और अनिमेष चक्रवर्ती ने दुनिया के सबसे महंगे आम “मियाजाकी मैंगो” की सफल खेती कर नई मिसाल कायम की है. खास बात यह है कि दोनों किसानों ने इस दुर्लभ और अत्यंत महंगे आम की खेती पूरी तरह जैविक तरीके से की है.

इस आम को “एग ऑफ सनशाइन” भी कहा जाता है

बताया जाता है कि जापान में उगाए जाने वाले मियाजाकी आम को दुनिया के सबसे प्रीमियम और महंगे आमों में गिना जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब ढाई लाख से तीन लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाती है. इसकी ऊंची कीमत के पीछे इसकी दुर्लभता, आकर्षक गहरा लाल रंग, मिठास, पौष्टिक गुण और औषधीय विशेषताएं प्रमुख कारण मानी जाती हैं। इस आम को “एग ऑफ सनशाइन” भी कहा जाता है.

भविष्य में वे इसकी खेती को और बड़े स्तर पर बढ़ाने की योजना

किसान भाइयों ने बताया कि उन्होंने इस आम का पौधा सीधे जापान से मंगवाया था. एक पौधे की कीमत करीब ढाई लाख रुपए पड़ी. इसके बावजूद उन्होंने जोखिम उठाते हुए अपने बागान में कुल आठ मियाजाकी आम के पौधे लगाए. लगातार देखभाल, जैविक खाद, विशेष सिंचाई व्यवस्था और अनुकूल वातावरण तैयार करने के बाद इस वर्ष पेड़ों में पहली बार सफलतापूर्वक 10 से 12 फल आए हैं.अरिंदम चक्रवर्ती और अनिमेष चक्रवर्ती का कहना है कि शुरुआत में लोगों को भरोसा नहीं था कि जापान का इतना महंगा आम जामताड़ा की मिट्टी में उगाया जा सकता है, लेकिन मेहनत और आधुनिक तकनीक के दम पर उन्होंने यह कर दिखाया. उन्होंने कहा कि भविष्य में वे इसकी खेती को और बड़े स्तर पर बढ़ाने की योजना बना रहे हैं ताकि क्षेत्र के अन्य किसान भी इससे प्रेरित होकर उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती की ओर आगे बढ़ सकें.

पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात

इस उपलब्धि पर स्थानीय विधायक एवं विधानसभा स्पीकर रविन्द्र नाथ महतो ने दोनों किसानों को बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि जामताड़ा के किसानों ने यह साबित कर दिया है कि यदि मेहनत, तकनीक और नवाचार को अपनाया जाए तो ग्रामीण क्षेत्र के किसान भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेती कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि “इसी तरह के प्रयास नाला और कुंडहित क्षेत्र को विकास और आधुनिक कृषि की नई पहचान दिलाएंगे.”

झारखंड के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुका

गौरतलब है कि दोनों किसान भाइयों ने अपने बागान में सैकड़ों अन्य प्रजातियों के आम के पेड़ भी लगाए हैं, लेकिन मियाजाकी आम की सफल खेती ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई है. अब उनके बागान को देखने के लिए आसपास के किसान और लोग पहुंच रहे हैं. कृषि विशेषज्ञ भी इसे झारखंड में हाई-वैल्यू खेती की दिशा में बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं. जामताड़ा की धरती पर उगा यह “लाल सोना” अब पूरे झारखंड के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुका है. किसानों की मेहनत और नवाचार ने यह साबित कर दिया है कि खेती में नए प्रयोग कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है.

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