Bermo: बेरमो अनुमंडल के बोकारो थर्मल के नूरीनगर स्थित डीवीसी के दोनों ऐश पौंड वर्तमान में छाई (फ्लाई ऐश) से पूरी तरह लबालब हो चुके हैं, जिससे आगामी मानसून के दौरान स्थिति भयावह होने की आशंका गहराने लगी है. दरअसल, वर्तमान में पौंड से जितनी मात्रा में छाई का उठाव होना चाहिए, उसकी तुलना में महज आधा ही उठाव हो पा रहा है, जबकि पावर प्लांट से रोज निकलने वाली छाई की मात्रा इससे दोगुनी है. स्थिति बिगड़ने का मुख्य कारण छाई उठाने वाली तीन कंपनियों में से दो (वी-टू-वी और जेडीएनएस) का काम बंद करना है.
फिलहाल केवल सारण नामक कंपनी ही करीब 30 हाईवा के जरिए प्रतिदिन लगभग 1500 से 2000 मीट्रिक टन छाई का उठाव कर उसे हजारीबाग के माइंस और तोपचांची में नेशनल हाईवे के कार्यस्थल पर भेज रही है. छाई का उठाव करने के क्रम में हाईवा से ओवरलोड छाई का उठाव जारी है. इसके अलावा ऐश टैक कंपनी के एक हाईवा द्वारा पावर प्लांट स्थित रेलवे साइडिंग में छाई गिराने का काम किया जा रहा है.


छाई का जमाव बढ़ने से पर्यावरणीय खतरे की आशंका
वाहनों की संख्या में अपेक्षित बढ़ोतरी न होने के कारण यह संकट खड़ा हुआ है, क्योंकि प्लांट से प्रतिदिन करीब तीन से साढ़े तीन हजार मीट्रिक टन छाई निकलकर पौंड में जमा हो रही है. निकासी धीमी होने के कारण दो नंबर ऐश पौंड से भारी मात्रा में छाई बहकर दो नंबर सेटलिंग पौंड में चली गई है, जिसे अब पोकलेन और हाईवा की मदद से निकालकर एक नंबर पौंड में डंप किया जा रहा है. पौंडों में छाई की 10-15 फीट ऊंची दीवार जैसी स्थिति बन गई है, जिससे इसकी क्षमता का अत्यधिक दोहन हो रहा है. स्थानीय स्तर पर यह चिंता जताई जा रही है कि यदि बरसात से पहले इस भारी जमाव को खाली नहीं किया गया, तो बारिश के पानी के साथ बहकर छाई निचले रिहायशी इलाकों और स्थानीय नदी में समा सकती है, जो पर्यावरण के लिहाज से भी नुकसानदेह होगा.
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जीएम ने कहा, मानसून से पहले स्थिति होगी नियंत्रित
इस गंभीर मसले पर डीवीसी के ऐश मैनेजमेंट सिस्टम के जीएम एए कुजूर ने प्रबंधन का पक्ष रखते हुए आश्वस्त किया है कि वर्तमान में 30 हाईवा के माध्यम से रोजाना दो हजार मीट्रिक टन छाई की निकासी जारी है और जल्द ही वाहनों की संख्या और बढ़ाई जा रही है. उन्होंने कहा कि प्रबंधन पूरी तरह मुस्तैद है और बरसात की शुरुआत से पहले पौंड को तय सीमा तक खाली कर स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि या तकनीकी समस्या का सामना न करना पड़े.

