एनडीए की बैठक में 17 का दम, बाकी सब पूर्व सूचित सिंड्रोम के शिकार, कल से एक साथ रहेंगे एनडीए विधायक

Ranchi: झारखंड में राज्यसभा चुनाव का बिगुल बजते ही नेताओं की ‘अंतरात्मा’ अचानक जाग उठी है. राजधानी रांची में एनडीए विधायक दल...

Ranchi: झारखंड में राज्यसभा चुनाव का बिगुल बजते ही नेताओं की ‘अंतरात्मा’ अचानक जाग उठी है. राजधानी रांची में एनडीए विधायक दल की बैठक में 17 विधायक पहुंचे. बैठक में विधायकों से ज्यादा तो एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की उम्मीदें और आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो के भरोसे का आकार बड़ा था. इस बैठक में चुनावी रणनीति बनी. बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, पूर्णिमा दास साहू, शत्रुघ्न महतो, आलोक चौरसिया, प्रकाश राम, रागिनी सिंह और यहां तक कि जेडीयू के सरयू राय भी नजर नहीं आए. आजसू के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो ने कहा कि कल से सब एक साथ रहेंगे.

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कांग्रेस मुक्त सरकार और आधे विधायकों का भविष्यवक्ता एंगल

बैठक में रणनीति तो सिर्फ वोटिंग की बननी थी, लेकिन विधायक अमित महतो ने बड़े ही पंचिंग अंदाज में कहा कि झारखंड में जल्द ही एक नया सीन दिखेगा, वह है कांग्रेस मुक्त सरकार. दावा किया कि चुनाव के ठीक बाद कांग्रेस के आधे विधायक बोरिया-बिस्तर समेटकर झामुमो में विलीन हो जाएंगे.

मैं सिर्फ परिमल बाबू के लिए अधिकृत हूं

बीजेपी के कद्दावर और सीनियर विधायक सीपी सिंह जब बैठक से बाहर निकले, तो कहा कि मुझे पार्टी ने सिर्फ परिमल नाथवानी को वोट देने का निर्देश दिया है, इससे ज्यादा किसी चीज के लिए मैं अधिकृत नहीं हूं.

परिमल नाथवानी का ‘रूरल’ प्रेम: पहले दो जिलों का उद्धार करूंगा

इधर, एनडीए के समर्थन से अपनी नैया पार लगाने की उम्मीद में बैठे निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी बेहद भावुक नजर आए. उन्होंने बैठक के बाद अपनी दूरगामी सोच का खुलासा करते हुए कहा कि वे झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों और पिछड़े इलाकों का कायाकल्प करना चाहते हैं. उन्होंने बताया, मैं पिछड़े इलाकों के सभी विधायकों से मिल रहा हूं और शुरुआत में दो जिलों से काम शुरू करूंगा.

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‘मॉक पोल’ बनाम ‘अंतरात्मा का पोल’

एक तरफ इंडिया गठबंधन मुख्यमंत्री आवास में ‘मॉक पोल’ कराकर अपने कुनबे को एक-एक वोट की गिनती सिखा रहा है, तो दूसरी तरफ एनडीए मात्र 17 विधायकों के साथ ‘अखंड एकजुटता’ का शंखनाद कर रहा है. कुल मिलाकर, झारखंड का यह राज्यसभा चुनाव अब केवल दो सीटों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह इस बात का लिटमस टेस्ट बन चुका है कि किस पार्टी के विधायक की ‘अंतरात्मा’ किस तरफ ज्यादा जोर से धड़कती है.

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