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EXCLUSIVE : प्रदूषण माफियाओं की अब खैर नहीं, 12 जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों का होगा संपूर्ण एक्सरे, जहर उगलने वाली फैक्ट्रियां होंगी सील

Ranchi : उद्योगों से बेलगाम बढ़ते प्रदूषण पर पूरी तरह से नकेल कसने के लिए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक...

Ranchi : उद्योगों से बेलगाम बढ़ते प्रदूषण पर पूरी तरह से नकेल कसने के लिए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है. राज्य सरकार पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले और नदियों जमीन में केमिकल युक्त कचरा बहाने वाले औद्योगिक क्षेत्रों के खिलाफ एक महा-मूल्यांकन अभियान (इंवायरमेंटल एसेसमेंट) शुरू करने जा रही है. झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य के 12 सबसे बड़े और सबसे प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्रों का पूरा एक्सरे करने का फैसला किया है. इसके तहत हवा की शुद्धता, पीने के पानी और नदियों की सेहत से लेकर शहरों से निकलने वाले सॉलिड वेस्ट (ठोस कचरे) तक की गहन जांच की जाएगी.

क्या है यह मास्टर प्लान और इसके उद्देश्य

• पर्यावरणीय मापदंडों की सटीक निगरानी : हवा, सतह के पानी (नदियों, तालाबों) और भूजल (ग्राउंड वाटर) की गुणवत्ता की बारीकी से जांच करना.
• प्रदूषण के स्रोतों की पहचान : यह पता लगाना कि कौन से उद्योग या क्लस्टर किस स्तर का प्रदूषण फैला रहे हैं.
• ठोस कचरे का वर्गीकरण : नगर निगम और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे और उससे निकलने वाले हानिकारक तरल (लीचेट) का गहन भौतिक और रासायनिक विश्लेषण करना.
• एक्शन प्लान का निर्माण : जांच से मिले वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए भविष्य की कड़ी योजनाएं और सुधारात्मक कदम उठाना.

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प्रदूषण के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण : कैसे तय होता है खतरा

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण के खतरे को मापने के लिए एक विशेष वैज्ञानिक पैमाना तैयार किया है. जिसे व्यापक पर्यावरणीय प्रदूषण सूचकांक कहा जाता है. यह 0 से 100 के बीच का एक डिजिटल स्कोर होता है. जो प्रदूषण के स्रोतों, उसके फैलने के रास्तों और इंसानों व प्रकृति पर पड़ने वाले असर के आधार पर तय होता है. इसके तहत तीन श्रेणियां बनाई गई हैं.
• गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्र : जिन औद्योगिक क्षेत्रों का कुल सीइपीआइ स्कोर 70 या उससे अधिक होता है, उन्हें इस रेड जोन में रखा जाता है. यहां तत्काल और सख्त सुधारात्मक कदमों की जरूरत होती है.
• अति प्रदूषित क्षेत्र : जिनका स्कोर 60 से 70 के बीच होता है. वे इस श्रेणी में आते हैं. इन पर भी विशेष निगरानी रखी जाती है.
• अन्य प्रदूषित क्षेत्र : 60 से कम स्कोर वाले क्षेत्र इस श्रेणी में शामिल होते हैं.

झारखंड के इन 12 जिलों और औद्योगिक क्षेत्रों पर गिरेगी गाज

झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य के जिन 12 प्रमुख औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों को इस सख्त निगरानी के दायरे में लिया है. वहां बड़े पैमाने पर सैंपलिंग की जाएगी. प्रत्येक क्षेत्र से हवा, जमीन के अंदर का पानी, नदियों का पानी और ठोस कचरे के 8-8 सैंपल लिए जाएंगे. यानी हर एक क्षेत्र से कुल 32 सैंपल और पूरी राज्य से सैकड़ों सैंपल्स का कड़ा परीक्षण होगा.

ये 12 क्षेत्र निम्नलिखित हैं – पलामू, चतरा, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, रामगढ़, बोकारो औद्योगिक क्षेत्र, धनबाद, सरायकेला खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम, जमशेदपुर और पाकुड़. इन सभी जगहों पर किसी भी प्रकार की हेरफेर को रोकने के लिए एक ही सीजन के दौरान कम से कम तीन अलग अलग राउंड में सैंपल इकट्ठे किए जाएंगे ताकि रिपोर्ट पूरी तरह सटीक और अकाट्य हो.

हवा से लेकर पानी तक, हर जहर की होगी पहचान

• हवा की शुद्धता की जांच : औद्योगिक क्षेत्रों में 24 घंटे लगातार हवा की क्वालिटी मॉनिटर की जाएगी. इसमें सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, धूल के महीन कण और, अमोनिया और लेड (सीसा) जैसे खतरनाक तत्वों को मापा जाएगा. इसके अलावा ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड, बेंजीन और आर्सेनिक जैसे जानलेवा रसायनों की मौजूदगी की भी जांच होगी.
• पानी के स्रोतों का एक्सरे : औद्योगिक क्षेत्रों के पास से बहने वाली नदियों, नहरों, तालाबों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले ट्रीटेड पानी की कड़ाई से जांच होगी. साथ ही आम जनता द्वारा पीने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हैंडपंपों, बोरवेल और चापाकालों के पानी का भी परीक्षण होगा. पानी के पीएच मान, बीओडी, सीओडी, फ्लोराइड, क्लोराइड, भारी धातुओं (जैसे जिंक, कॉपर, कैडमियम, मरकरी, क्रोमियम, निकेल, आयरन) और खतरनाक कीटनाशकों की मात्रा जांची जाएगी. जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि लोगों तक जहर तो नहीं पहुंच रहा है.
• कचरे और लीचेट का विश्लेषण : नगर निगमों और फैक्ट्रियों के कचरे के ढेरों से निकलने वाले बदबूदार और जहरीले पानी (लीचेट) की भी रासायनिक जांच की जाएगी. जिससे वह जमीन के अंदर जाकर भूजल को दूषित न कर सकें.

कड़े नियमों के साथ होगी एक्सपर्ट एजेंसियों की एंट्री

इस महाअभियान को पूरी तरह पारदर्शी और विश्वस्तरीय बनाने के लिए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने केवल उन्हीं एजेंसियों को मौका देने का फैसला किया है, जिनके पास अत्याधुनिक सुविधाएं और बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड हो. शॉर्टलिस्ट होने के लिए एजेंसियों के पास नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीजका वैध सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है. तकनीकी मूल्यांकन में कुल 100 अंकों में से कम से कम 70 अंक लाने वाली एजेंसी ही इस रेस में आगे बढ़ पाएगी. इसमें एजेंसी के पिछले अनुभव, वैज्ञानिकों की योग्यता, लैब के इंफ्रास्ट्रक्चर और उनकी कार्यप्रणाली) की प्रस्तुति के आधार पर नंबर दिए जाएंगे.

जवाबदेही और गोपनीयता

• सरप्राइज विजिट और ऑन-स्पॉट चेकिंग : प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी जांच के दौरान कभी भी फील्ड लोकेशन या चयनित एजेंसी की प्रयोगशालाओं का औचक निरीक्षण कर सकते हैं
• डुप्लीकेट सैंपलिंग का प्रावधान : पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कुल सैंपल्स के 3% सैंपल डुप्लीकेट के रूप में सीलबंद करके सीधे प्रदूषण बोर्ड के मुख्यालय को सौंपे जाएंगे.
• लेटलतीफी पर भारी जुर्माना : फील्ड वर्क पूरा होने के बाद 3 सप्ताह के भीतर अंतिम रिपोर्ट एमएस एक्सेल और वर्ड फॉर्मेट में सौंपनी होगी. यदि रिपोर्ट सौंपने में देरी होती है, तो एजेंसी पर प्रति सप्ताह कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट का 1% जुर्माना लगाया जाएगा. जो अधिकतम 15% तक हो सकता है.
• डेटा की पूर्ण गोपनीयता : इस जांच के दौरान मिलने वाले सभी आंकड़े बेहद गोपनीय और केवल झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संपत्ति होंगे.बोर्ड की लिखित अनुमति के बिना इन्हें कहीं भी प्रकाशित नहीं किया जा सकेगा .

 

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