Bermo: जनहित एवं विस्थापित परिवारों के अधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ मंगलवार को कोलकाता स्थित डीवीसी मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई. इस महत्वपूर्ण बैठक में गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने डीवीसी के नवनिर्वाचित सदस्य सचिव सिद्धार्थ शंकर दास एवं अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक के दौरान विस्थापितों, स्थानीय युवाओं और जनसरोकारों से जुड़े विभिन्न गंभीर मुद्दों पर विस्तृत एवं सार्थक चर्चा हुई.
विकास का लाभ सबसे पहले विस्थापितों को मिले-सांसद
बैठक में सांसद सीपी चौधरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिया. उन्होंने कहा, विकास की प्रक्रिया केवल बड़ी परियोजनाओं और संयंत्रों के निर्माण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. विकास की प्रत्येक योजना का लाभ सबसे पहले उन प्रभावित एवं वंचित परिवारों तक पहुंचना चाहिए, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण की इस यात्रा में अपनी भूमि, संसाधन एवं जीवन का महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
बैठक में मुख्य रूप से उठाए गए निम्नलिखित अहम मुद्दे
सम्मानजनक पुनर्वास और पेप कार्ड – नए संयंत्रों के कारण परियोजना प्रभावित परिवारों के त्वरित पुनर्वास और उन्हें जल्द से जल्द पेप कार्ड निर्गत करने की मांग की गई.
मूलभूत सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण – पुनर्वास गांवों में बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, निर्बाध बिजली, शुद्ध पेयजल, बेहतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ. इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल वैन और अस्पताल सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दिया गया.
रोजगार और कौशल विकास – स्थानीय युवाओं और विस्थापितों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा युवाओं के तकनीकी विकास के लिए क्षेत्रीय आईटीआई के उन्नयन पर चर्चा हुई.
श्रमिकों और पेंशनरों के हितों की रक्षा – बैठक में मेंटेनेंस श्रमिकों के अधिकारों, पेंशनभोगियों की समस्याओं और भूमि म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) के मामलों के समयबद्ध और प्रभावी समाधान के लिए विशेष बल दिया गया.
त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की मांग
सांसद ने डीवीसी के नए सदस्य सचिव सिद्धार्थ शंकर दास और उपस्थित अधिकारियों को विस्थापितों व स्थानीय युवाओं की समस्याओं के प्रति त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा. उन्होंने साफ किया कि लोकहित, सामाजिक न्याय और क्षेत्र का समग्र विकास उनकी प्राथमिकता में सर्वोपरि रहेगा और विस्थापितों के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा. इस बैठक के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि डीवीसी की विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों की लंबित समस्याओं का जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक समाधान निकलेगा.



