Ranchi: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन के पहली पाली में हंगामे, तीखी नोकझोंक और सियासी खींचतान के नाम रहा. सदन के बाहर से लेकर अंदर तक विपक्ष ने JPSC-JSSC की परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों और धांधलियों के खिलाफ जमकर हल्ला बोला. विपक्ष इन तमाम परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच अदालत की निगरानी में CBI से कराने की मांग पर अड़ा हुआ है.
वेल में पहुंचे भाजपा विधायक
शुक्रवार को जैसे ही झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों के तेवर पहले से ही आक्रामक नजर आए. कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा और अन्य विपक्षी दलों के विधायक अपनी सीटों से खड़े हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी. विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गए और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे. सदन में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य की चयन आयोगों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. बाबूलाल मरांडी ने सदन में तीखा बयान देते हुए कहा- पिछले दिनों झारखंड में जितनी भी परीक्षाएं आयोजित की गई हैं, लगभग सभी में भारी गड़बड़ियां पाई गई हैं. चाहे वह सहायक आचार्य परीक्षा हो, झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा हो, उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा हो, PGT शिक्षक नियुक्ति परीक्षा हो या फिर 11वीं, 12वीं, 13वीं और 14वीं जेपीएससी की परीक्षाएं हों इन सभी में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है. नेता प्रतिपक्ष ने राज्य के बेरोजगार युवाओं की दयनीय स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि आज सूबे के छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं और भारी बारिश के बीच भी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ की सच्चाई सामने लाने के लिए इन सभी मामलों की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई से कराई जानी चाहिए.

संसदीय कार्यमंत्री की दो टूक
विपक्ष के हंगामे और वेल में उतरने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विपक्ष के रवैये की आलोचना की. उन्होंने कहा कि आज सदन के पटल पर प्रथम अनुपूरक बजट पेश किया जाना है, जो राज्य के विकास और वित्तीय प्रबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. JPSC-JSSC के मुद्दों पर चर्चा के लिए सदन में पूरा मौका दिया जाएगा.जब सदन में विधिवत वाद-विवाद और चर्चा का क्रम शुरू होगा, तब विपक्ष अपनी बात विस्तार से रख सकता है. बजट सत्र या मानसून सत्र के दौरान इस तरह बीच में सदन की कार्यवाही को बाधित करना और व्यवधान उत्पन्न करना पूरी तरह अनुचित है. इसके बावजूद विपक्षी विधायक शांत नहीं हुए और वे वेल में खड़े होकर लगातार नारेबाजी करते रहे.

सत्ता पक्ष का पलटवार
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने तीखा पलटवार किया. उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के लोग भी पूरी तरह से राज्य के छात्रों और उनकी जायज मांगों के साथ खड़े हैं. सरकार युवाओं के हितों के प्रति संवेदनशील है और इसी का नतीजा है कि इस मामले में पहले से ही CID जांच तेजी से चल रही है. प्रदीप यादव ने सवालिया लहजे में कहा कि इस मामले में अब तक दो दर्जन से अधिक लोगों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है. ऐसे में उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से सीधा सवाल पूछते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष को CID की जांच से इतना भय और ऐतराज क्यों है? आज देश और राज्य में CBI की विश्वसनीयता पर से लोगों का विश्वास उठ चुका है, क्योंकि यह एक पॉलीटिकल एजेंसी के रूप में काम करती नजर आती है. विपक्ष केवल 12वीं, 13वीं और 14वीं JPSC की परीक्षाओं के बारे में ही क्यों बात कर रहा है? वह राज्य की पहली से तीसरी जेपीएससी के दौर में हुई नियुक्तियों पर चुप्पी क्यों साधे हुए है. पुलिस और जांच एजेंसियां पहले से ही मामले की तह तक जाने के लिए पड़ताल कर रही हैं. ऐसे में सनसनी फैलाने के बजाय छात्रों से सीधा संवाद स्थापित कर इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकाला जाना चाहिए.
स्पीकर का तंज और मंत्री सुदिव्य सोनू का विपक्ष पर निशाना
हंगामे के बीच विधानसभा स्पीकर ने तंज कसते हुए कहा कि आज सदन में पहले नीट परीक्षा वाला मुद्दा उठेगा या फिर JPSC वाला? उन्होंने कहा कि इस सत्र के दौरान झारखंड की कृषि, किसानों की समस्याओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर चर्चा होनी चाहिए. इसी बीच, मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को सार्वजनिक रूप से यह बताना चाहिए कि झारखंड गठन के शुरुआती दौर की पहली और दूसरी JPSC परीक्षाओं का क्या परिणाम निकला था और उन परीक्षाओं के माध्यम से उनके अपने कितने रिश्तेदार और करीबी लोग आज सरकारी नौकरियों में काबिज हैं. हंगामा बढ़ा देख विधानसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को तत्काल प्रभाव से दोपहर 12:30 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी.
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