Ranchi: झारखंड में मनरेगा कर्मियों का लंबे समय से सुलग रहा असंतोष अब खुलकर सड़क पर उतर आया है. अपनी विभिन्न मांगों को लेकर झारखंड राज्य मनरेगा कर्मियों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया. कर्मियों ने कहा है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक वे अनशन समाप्त नहीं करेंगे.
मनरेगा कर्मियों की सबसे बड़ी मांग ग्रेड पे आधारित वेतनमान लागू करने की है. उनका कहना है कि वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने का काम करने के बावजूद उन्हें न तो सम्मानजनक वेतन मिल रहा है और न ही सेवा सुरक्षा. कर्मियों का आरोप है कि राज्य की महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन उनके कंधों पर है, लेकिन उनके भविष्य को लेकर सरकार गंभीर नहीं है.
अनशन पर बैठे कर्मियों ने कहा…
आंदोलनकारियों ने सेवा के दौरान दिवंगत हुए 156 मनरेगा कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने की भी मांग उठाई है. उनका कहना है कि जिन कर्मियों ने अपनी पूरी जिंदगी सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लगा दी, उनके निधन के बाद परिवारों को बेसहारा छोड़ दिया गया. ऐसे परिवार आज आर्थिक तंगी और असुरक्षा के बीच जीवन यापन करने को मजबूर हैं. अनशन पर बैठे कर्मियों ने कहा कि कई बार ज्ञापन, वार्ता और आंदोलन के माध्यम से सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला. अब मजबूर होकर उन्हें आमरण अनशन का रास्ता अपनाना पड़ा है.
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