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गिरिडीह : गरीबों की थाली में जहर, हरला पंचायत में सड़ा-गला और फफूंदी युक्त गेहूं बांटने पर फूटा लाभुकों का गुस्सा

Giridih: सरकार एक ओर गरीबों को गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमुआ प्रखंड की हरला...

Giridih: सरकार एक ओर गरीबों को गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमुआ प्रखंड की हरला पंचायत में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत लाभुकों को सड़ा-गला और फफूंदी युक्त गेहूं वितरित किए जाने का मामला सामने आया है. खराब अनाज मिलने से लाभुकों में भारी आक्रोश है और उन्होंने पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. लाभुकों का आरोप है कि पीडीएस दुकान से जो गेहूं दिया जा रहा है, उसमें सुरसुरी (कीड़े) लगी हुई है. कई दाने काले पड़ चुके हैं, जबकि कुछ में फफूंदी लगने के कारण दुर्गंध आ रही है. लोगों का कहना है कि ऐसा अनाज इंसानों के खाने लायक नहीं है. फिर भी गरीब परिवारों को मजबूरी में यही राशन लेने के लिए विवश किया जा रहा है. लाभुकों ने सवाल उठाया कि आखिर खाद्य आपूर्ति विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां है. गरीबों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है.

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खराब अनाज की आपूर्ति रोकने और मामले की जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले पर संज्ञान नहीं लिया गया तो लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. उन्होंने प्रशासन से तत्काल खराब गेहूं की आपूर्ति रोकने और पूरे स्टॉक की जांच कराने की मांग की है. वहीं पीडीएस डीलर आशीष साव ने अपनी सफाई में कहा कि उन्हें गोदाम से ही खराब गुणवत्ता का गेहूं प्राप्त हुआ है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को सूचना दे दी गई है और जल्द ही खराब गेहूं को बदलकर लाभुकों के बीच गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न वितरित किया जाएगा.
फिलहाल सवाल यह है कि जब गोदाम से ही खराब अनाज भेजा गया, तो उसकी गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी किसकी थी? गरीबों की थाली तक सड़ा-गला गेहूं पहुंचना खाद्य आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.

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