Ranchi: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून यानि गुरुवार को होने जा रहा मतदान महज एक राजनैतिक मुकाबला नहीं, बल्कि सुरक्षा और खुफिया तंत्र की अग्निपरीक्षा बन गया है. इस बार का चुनाव पर्दे के पीछे से लड़ी जा रही एक ऐसी साइलेंट वॉर का गवाह बन रहा है, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी हाई अलर्ट के बीच राजधानी रांची को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है. लोकतंत्र के इस उत्सव में निष्पक्षता और शुचिता सुनिश्चित करने के लिए इस बार सुरक्षा का एक ऐसा अदृश्य पहरा तैयार किया गया है, जो आम जनता की नजरों से दूर रहकर भी हर हरकत पर बाज जैसी नजर रखे हुए है.
होटल से लेकर विधानसभा तक सीक्रेट एजेंट
राजनीतिक बिसात के सबसे संवेदनशील केंद्रों, होटल रेडिसन ब्लू, झारखंड विधानसभा, मुख्यमंत्री आवास और प्रमुख राजनीतिक दलों के दफ्तरों को खुफिया रडार पर ले लिया गया है. सूत्रों के मुताबिक, स्पेशल ब्रांच के 20 से अधिक टॉप और चुनिंदा अधिकारियों को इस ऑपरेशन की कमान सौंपी गई है. ये अधिकारी और कर्मचारी किसी आम नागरिक की तरह सादे कपड़ों में संदिग्धों के बीच मौजूद हैं. नेताओं की सीक्रेट मीटिंग्स, गाड़ियों का काफिला और हर वीआईपी मूवमेंट की लाइव ट्रैकिंग की जा रही है. स्पेशल ब्रांच और सीआईडी के ये विंग्स पल-पल का इनपुट सीधे मुख्यालय को भेज रहे हैं ताकि किसी भी पॉलिटिकल ट्विस्ट या संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल एक्शन लिया जा सके.
विधायकों की घेराबंदी और मनी ट्रेल पर पैनी नजर
इस चुनाव का सबसे बड़ा एंगल हॉर्स ट्रेडिंग और धनबल के इस्तेमाल को रोकना है. यही वजह है कि इस बार सिर्फ खाकी वर्दी मुस्तैद नहीं है, बल्कि देश की सबसे बड़ी वित्तीय जांच एजेंसी इनकम टैक्स के अधिकारियों को भी इस चक्रव्यूह में शामिल किया गया है. विधायकों की हर हलचल, उनके संपर्क और राजनीतिक दलों के गुप्त ठिकानों पर खुफिया कैमरे और इनपुट एक्टिव हैं. चुनावी माहौल में पैसों के अवैध लेन-देन और किसी भी तरह के प्रलोभन की संभावना को शून्य करने के लिए इनकम टैक्स की टीमें बैकस्टेज मुस्तैद हैं.
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जब तक नतीजा नहीं, तब तक हटेगा नहीं पहरा
सुरक्षा एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि जब तक मतदान की पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न नहीं हो जाती और मतपेटियां सील नहीं हो जातीं, तब तक यह स्पेशल ऑपरेशन जारी रहेगा. खुफिया इकाई के अधिकारियों को ‘जीरो टॉलरेंस’ मोड पर रखा गया है. इस तरह की निगरानी से स्पष्ट है कि कि आज के दौर में राज्यसभा का चुनाव सिर्फ विधानसभा के भीतर वोट डालने तक सीमित नहीं है. लोकतंत्र की शुचिता को बचाए रखने के लिए बैकग्राउंड में सुरक्षा और निगरानी का एक ऐसा चक्रव्यूह काम कर रहा है, जिसकी आहट भले ही सुनाई न दे, लेकिन उसका असर हर एक गतिविधि पर साफ दिखाई दे रहा है.



