Chaibasa: चाईबासा में अन्ना अमृता फाउंडेशन द्वारा संचालित सेंट्रल किचन का आज जिला उपायुक्त मनीष कुमार ने निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल, जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार, अन्ना अमृता फाउंडेशन के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे. निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने सेंट्रल किचन में भोजन तैयार करने की संपूर्ण प्रक्रिया, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, स्वच्छता व्यवस्था, भंडारण प्रणाली तथा विद्यालयों तक भोजन पहुंचाने की व्यवस्था का जायजा लिया. उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों एवं फाउंडेशन के प्रतिनिधियों को निर्देशित किया, कि विद्यालयों में आयोजित होने वाले तिथि भोज कार्यक्रमों में बच्चों के लिए खीर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा मिक्स दाल-सब्जी परोसे जाने की व्यवस्था को बंद किया जाए, ताकि बच्चों को अधिक स्वादिष्ट, पौष्टिक एवं विविधतापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा सके.
भोजन वितरण में प्रयुक्त सभी वाहनों में जीपीएस ट्रैकर लगाने का निर्देश
उपायुक्त ने भोजन परिवहन व्यवस्था की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया, कि भोजन वितरण में प्रयुक्त सभी वाहनों में जीपीएस ट्रैकर अनिवार्य रूप से लगाया जाए, जिससे वाहनों की वास्तविक समय में निगरानी की जा सके तथा निर्धारित समय पर विद्यालयों तक भोजन की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके. इस दौरान उन्होंने सेंट्रल किचन में कार्यरत कर्मियों से बातचीत कर उनके वेतन भुगतान, उपलब्ध सुविधाओं, कार्य अवधि एवं कार्य परिस्थितियों के संबंध में जानकारी प्राप्त की. उपायुक्त ने कर्मियों के कार्यों की सराहना करते हुए उनके सुझावों को भी गंभीरता से सुना. निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने सेंट्रल किचन परिसर में बनाए रखी गई स्वच्छता एवं साफ-सफाई व्यवस्था की प्रशंसा की तथा इसे निरंतर बनाए रखने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है.
भोजन की गुणवत्ता, पौष्टिकता एवं स्वाद पर विशेष ध्यान देने का निर्देश
उपायुक्त ने बताया कि वर्तमान में अन्ना अमृता फाउंडेशन के माध्यम से जिले के चार प्रखंडों के विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों एवं फाउंडेशन प्रबंधन को निर्देश दिया, कि भोजन की गुणवत्ता, पौष्टिकता एवं स्वाद पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर पोषण मिल सके और विद्यालयों में उनकी नियमित उपस्थिति को भी बढ़ावा मिले. उन्होंने स्पष्ट कहा कि मध्यान्ह भोजन योजना बच्चों के स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है, इसलिए भोजन तैयार करने से लेकर उसके वितरण तक प्रत्येक स्तर पर निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
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