Click Here
Click Here
Click Here

जमाई षष्ठी 2026: क्यों खास है दामाद के सम्मान का यह अनोखा बंगाली पर्व?, 20 जून को मनाई जाएगी जमाई षष्ठी

Newswave Desk: बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं में जमाई षष्ठी का विशेष महत्व है. वर्ष 2026 में यह पर्व 20 जून, शनिवार को...

Newswave Desk: बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं में जमाई षष्ठी का विशेष महत्व है. वर्ष 2026 में यह पर्व 20 जून, शनिवार को मनाया जाएगा. यह त्योहार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है और दामाद के सम्मान, परिवार की खुशहाली तथा रिश्तों की मजबूती का प्रतीक माना जाता है.

दामाद के सम्मान से जुड़ी अनूठी परंपरा

‘जमाई’ का अर्थ दामाद और ‘षष्ठी’ का अर्थ चंद्र मास की छठी तिथि है. इस दिन बेटी और दामाद को मायके में विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है. सास अपने दामाद का पारंपरिक तरीके से स्वागत करती हैं, आरती उतारती हैं और उनके सुख, समृद्धि तथा दीर्घायु की कामना करती हैं.

WhatsApp Image 2026-06-13 at 2.57.59 PM (1)

मां षष्ठी की पूजा का विशेष महत्व

यह पर्व केवल दामाद के सत्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि मां षष्ठी की पूजा से भी जुड़ा हुआ है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार मां षष्ठी बच्चों और परिवार की रक्षक देवी मानी जाती हैं. इस दिन उनकी पूजा कर परिवार की खुशहाली, संतान की सुरक्षा और वैवाहिक जीवन की समृद्धि की कामना की जाती है.

कैसे शुरू हुई यह परंपरा?

लोककथाओं के अनुसार प्राचीन समय में विवाह के बाद बेटियां अपने मायके कम आ पाती थीं. ऐसे में परिवारों ने एक विशेष दिन निर्धारित किया, जब बेटी और दामाद दोनों को सम्मानपूर्वक घर बुलाया जाए. धीरे-धीरे यह परंपरा जमाई षष्ठी के रूप में विकसित हुई और बंगाल की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान बन गई.

स्वादिष्ट भोज होता है आकर्षण का केंद्र

जमाई षष्ठी का सबसे बड़ा आकर्षण पारंपरिक बंगाली भोज होता है. दामाद के लिए विशेष व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जिनमें मछली, मिठाइयां, मौसमी फल और कई पारंपरिक पकवान शामिल होते हैं. यह पर्व परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ बैठकर समय बिताने और रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी देता है.

आधुनिक दौर में भी कायम है परंपरा

समय के साथ जीवनशैली बदलने के बावजूद जमाई षष्ठी की लोकप्रियता बनी हुई है. आज भी पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और बंगाली समुदायों में यह पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. कई परिवार इसे पारिवारिक पुनर्मिलन और रिश्तों में प्रेम व सम्मान बढ़ाने के अवसर के रूप में देखते हैं.

रिश्तों में प्रेम और सम्मान का उत्सव

जमाई षष्ठी केवल दामाद के सत्कार का पर्व नहीं, बल्कि परिवार, प्रेम, सम्मान और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने वाली एक सांस्कृतिक परंपरा है. यही कारण है कि यह त्योहार आज भी बंगाल की सबसे अनोखी और जीवंत पारिवारिक परंपराओं में गिना जाता है.

ALSO READ : कोडरमा: नगर पंचायत बोर्ड की बैठक में मॉड्यूलर टॉयलेट के साफ-सफाई और रखरखाव के नाम पर भुगतान पर रोक

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *