Chatra: हंटरगंज प्रखण्ड के जोल्डिहा पंचायत के कुरखेता गांव के अम्बरातरी टोला में बसने वाले आदिम जनजाति बिरहोर परिवार के लोग चुआं का गंदा पानी पीने को क्यों अभिशप्त हैं? क्या चतरा जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे या बच्चों की जान पर आफत आने की इंतजार कर रही है. इस गांव में ना ही पीने की पानी और ना ही स्कूल भवन और चापाकल की व्यवस्था की गई है और ना ही ग्रामीणों को बिजली का कनेक्शन दिया गया है. ऐसे में गांव में बसर करने वाले बिरहोर परिवार नाले की गन्दे पानी पीकर स्वास्थ्य से भी लड़ रहे हैं.
क्या है मामला
चतरा जिले के हंटरगंज प्रखण्ड के जोल्डिहा पंचायत के कुरखेता गांव जिसका एक टोला है अम्बरातरी गांव के विकास के दावों को मुंह चिढ़ाती बिरहोर टोले की बदहाल स्थिति, इनलोगो के दिनचर्या देखकर किन्ही को भी आश्चर्य लगेगा. एक तरफ सरकार आदिम जनजातियों के उत्थान और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हर साल करोड़ों का बजट पास कर रही है, तो दूसरी तरफ धरातल पर सच्चाई कलेजा कंपा देने वाली है. आजादी के 79 साल बीत जाने के बाद भी हंटरगंज प्रखंड के कुरखेता गांव स्थित अम्बरातरी बिरहोर टोला आज भी आदम युग में जीने को मजबूर और बेबस है. ग्रामीण एक छोटे से चुआं (गड्ढे) के गंदे पानी को कपड़े से छानकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं.
महामारी का खतरा
इसी दूषित और संक्रामक पानी को पीने के लिए टोले की गर्भवती महिलाएं और छोटे मासूम बच्चे भी मजबूर हैं, जिससे यहां कभी भी कोई गंभीर महामारी पैर पसार सकती है. विडंबना देखिए कि सरकार ने इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ तो दे दिया, लेकिन पानी न होने के कारण कई ग्रामीण अपना आशियाना तक पूरा नहीं बना पा रहे हैं. बिना पानी के ईंट-जोड़ाई का काम अधर में लटका है. ग्रामीणों का साफ आरोप है कि उन्होंने अपनी इस बदहाली को लेकर और प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के दफ्तर के कई चक्कर काटे और लिखित-मौखिक गुहार लगाई. लेकिन, संवेदनहीन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. चुनाव के समय हाथ जोड़कर वोट मांगने आने वाले नेता आज इस टोले की सुध लेने को तैयार नहीं हैं.
क्या कहते हैं ग्रामीण
ग्रामीण अर्जुन बिरहोर,फागु बिरहोर,जगदीश बिरहोर,अनरवा बिरहोरीन,गीता,सुंदरी आदि ने जिला प्रशासन से गांव में शुद्घ पेयजल,कृषि कार्य हेतु कूप निर्माण,बेहतर शिक्षा के लिए स्कूल भवन निर्माण,एवं बिजली बहाल करने की मांग की है.
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