Hazaribagh : जिले में प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी जमीनों की सुरक्षा और जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. एक ओर उपायुक्त लगातार लोगों को न्याय दिलाने और मामलों में त्वरित कार्रवाई की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधीनस्थ अधिकारियों की कथित लापरवाही, मनमानी और नियमों की अनदेखी से आम लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. विवादित जमीन पर सड़क निर्माण, तालाब की जमीन पर अवैध दुकान निर्माण और जल स्रोतों पर बढ़ते अतिक्रमण जैसे मामलों ने प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
डीसी कार्यालय में न्याय की आस लेकर पहुंच रहे लोग
पिछले कुछ दिनों से उपायुक्त कार्यालय में फरियादियों की भीड़ बढ़ी है. लोग अपनी समस्याओं और शिकायतों के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंच रहे हैं. कई मामलों में संबंधित विभागीय अधिकारियों को शिकायतों के निष्पादन के लिए भेजा भी जा रहा है, लेकिन आरोप है कि कुछ मामलों में कार्रवाई फाइलों तक ही सीमित रह जा रही है. फरियादियों का कहना है कि जमीन संबंधी विवादों में प्रशासनिक आदेशों और न्यायालय के निर्देशों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है. इससे लोगों का भरोसा व्यवस्था पर कमजोर पड़ रहा है.

कोर्ट स्टे के बावजूद विवादित जमीन पर बना दी सड़क
जिले के कटकमसांडी थाना क्षेत्र के बरगड्डा पंचायत अंतर्गत मांडू देवी मंदिर के समीप स्थित एक विवादित भूमि पर सरकारी फंड से सड़क निर्माण का मामला सामने आया है. जानकारी के अनुसार, वाद संख्या 304/26 तारीख 16 जून 2026 के तहत आवेदक मुखिया पति ईश्वर देवी और वंदे केवट व केवट राहुल सोनी सहित अन्य पक्षों के बीच भूमि विवाद चल रहा है. मामले को लेकर पहले ही अंचल अधिकारी, बीडीओ और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन देकर निर्माण कार्य रोकने की मांग की गई थी.
अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी जारी रहा निर्माण
फरियादियों का आरोप है कि अंचलाधिकारी ने स्वयं स्थल पर पहुंचकर विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का कार्य नहीं होने देने का आश्वासन दिया था. इसके बावजूद कुछ ही घंटों बाद सरकारी योजना के तहत सड़क निर्माण शुरू कर दिया गया. शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित भूमि को लेकर एसडीओ कोर्ट से स्टे ऑर्डर भी प्राप्त है, फिर भी निर्माण कार्य कराया गया. अब मामले की शिकायत उपायुक्त से करते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है.
तालाब की जमीन पर दुकान निर्माण का आरोप
जिले के लोहसिंघना थाना क्षेत्र में भी सरकारी जमीन की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं. नगर निगम क्षेत्र के ओकनी तालाब की जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद अब उसी क्षेत्र में थाना परिसर के समीप एक नई दुकान के निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस जमीन से पहले अतिक्रमण हटाया गया था. वहीं थाना के ठीक बगल में रातों-रात एक बड़ा दुकाननुमा ढांचा तैयार कर दिया गया.
मिलीभगत या लापरवाही, उठ रहे सवाल
लोगों का कहना है कि थाना के बगल में निर्माण कार्य होना और पुलिस को इसकी जानकारी न होना संभव नहीं है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का है या फिर किसी प्रकार की मिलीभगत का है. स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर अवैध निर्माण हटाने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है. इस संबंध में लिखित शिकायत देने की भी तैयारी की जा रही है.
जल स्रोतों को भी बचाने की उठी आवाज
इधर समाजसेवी मनोज गुप्ता ने जिले के जल स्रोतों, नदी-नालों, तालाबों और जलमार्गों को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा है.
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय, झारखंड के निर्देशों और राज्य सरकार के आदेशों के अनुरूप जल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. उनका आरोप है कि जिले के कई जल स्रोतों पर लगातार अतिक्रमण बढ़ रहा है. जिससे भविष्य में जल संकट गहरा सकता है.
छड़वा डैम क्षेत्र में भू-माफियाओं की सक्रियता का आरोप
मनोज गुप्ता ने आरोप लगाया कि छड़वा डैम के बड़े हिस्से में भू-माफियाओं द्वारा प्लॉटिंग कर जमीन बेची जा रही है. उन्होंने डैम क्षेत्र की पैमाइश कराकर अतिक्रमण हटाने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो शहरवासियों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है.
नदी-नालों और जलमार्गों पर भी बढ़ा दबाव
ज्ञापन में कन्हरी, रामनगर, हुरहुरू, विष्णुपुरी, कुम्हरटोली सहित कई इलाकों में नदी और नालों से जुड़े जलमार्गों पर अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया गया है. मनोज गुप्ता ने कहा कि कई स्थानों पर जल निकासी मार्ग बाधित होने से प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित हो रहा है, जिसका असर पर्यावरण और जल संरक्षण दोनों पर पड़ रहा है.
22 तालाबों की स्थिति पर भी उठे सवाल
ज्ञापन में नगर निगम क्षेत्र के 22 तालाबों का भी उल्लेख किया गया है. आरोप लगाया गया है कि कई तालाबों के हिस्सों पर अवैध कब्जा हो चुका है. विशेष रूप से 7.50 एकड़ क्षेत्र में फैले धोबिया तालाब के लगभग 2 एकड़ हिस्से पर अतिक्रमण होने की बात कही गई है.
कार्रवाई नहीं होने से बढ़ रही चिंता
ज्ञापन के अनुसार, पूर्व में भी कई अतिक्रमणकारियों की पहचान की गई थी, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर प्रशासनिक उदासीनता पर चिंता जताते हुए सभी तालाबों, नदी-नालों और जलमार्गों को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की गई है.


