Ranchi: राजधानी रांची की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जिसमें करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति कबाड़ में तब्दील हो चुकी है और नई बसों की योजनाएं वर्षों से फाइलों में दम तोड़ रही हैं. शहर में बेहतर बस सेवा देने के नाम पर 7.50 करोड़ रुपये खर्च कर खरीदी गई 70 सिटी बसें अब पूरी तरह कंडम हो चुकी हैं, जबकि 244 बसों के परिचालन की महत्वाकांक्षी योजना सरकारी फाइलों में दबी पड़ी है. अब नगर निगम ने एक बार फिर 17 नई सिटी बसें खरीदने की कवायद शुरू की है.
साल 2010 में 70 सिटी बसें खरीदी गईं थी
नगर निगम ने वर्ष 2010 में JNNURM योजना के तहत 70 सिटी बसें खरीदी थीं. मकसद था राजधानी को बेहतर सार्वजनिक परिवहन देना, लेकिन वर्षों की अनदेखी, खराब प्रबंधन और ठोस संचालन नीति के अभाव में ये बसें सड़ती रहीं और अब कबाड़ बन चुकी हैं. इन बसों की रजिस्ट्रेशन अवधि भी समाप्त हो चुकी है, यानी करोड़ों रुपये की यह पूरी परियोजना अब सिर्फ नाकामी की मिसाल बनकर रह गई है. मामला यहीं नहीं रुका. करीब तीन साल पहले 244 बसों के परिचालन की नई योजना बनाई गई थी. निजी ऑपरेटर के जरिए बसें चलाने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हुई, कंपनी चयन का प्रस्ताव नगर विकास विभाग को भेजा गया, लेकिन इसके बाद पूरी योजना फाइलों में कैद होकर रह गई. न बसें आईं, न शहर को राहत मिली.

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सिर्फ 22 बसों के भरोसे चल रही राजधानी
रांची जैसे तेजी से फैलते शहर में फिलहाल महज 22 सिटी बसें ही सड़कों पर हैं. ये बसें कचहरी चौक से मेन रोड होते हुए धुर्वा और तुपुदाना तक सीमित हैं. शहर के बाकी हिस्सों में बस सेवा नहीं होने से लोग मजबूरी में ऑटो और निजी वाहनों पर निर्भर हैं. इसका सीधा असर उनकी जेब पर पड़ रहा है, वहीं शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम की समस्या और गंभीर होती जा रही है.
अब 17 नई बसें खरीदने की तैयारी
लंबे इंतजार और पुरानी योजनाओं की विफलता के बीच नगर निगम ने अब अपने स्तर पर 17 नई सिटी बसों की खरीदारी की तैयारी शुरू की है. इसके लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं और अगले महीने तक टेंडर फाइनल कर खरीद प्रक्रिया शुरू करने की बात कही जा रही है.


