Ranchi: बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में महिला बंदी से तथाकथित यौन शोषण एवं गर्भधारण से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले पर झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश एस एम सोनक एवं न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ में सुनवाई हुई. सुनवाई के उपरांत अदालत के समक्ष मामले में हुई न्यायिक जांच एवं गर्भधारण से जुड़े मेडिकल रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई. मामले में अदालत ने कहा कि जांच एवं मेडिकल की रिपोर्ट देखने के बाद वह निर्णय लेंगे और अगली सुनवाई की तिथि 9 जुलाई को होगी.
महिला ने अदालत के समक्ष दिया है लिखित बयान
बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में महिला कैदी के कथित यौन शोषण और गर्भवती होने के मामले पर में नया मोड़ आ गया ह महिला कैदी ने खुद ही ऐसे किसी मामले से इनकार कर दिया है. अदालत के समक्ष दिए पत्र में महिला ने कहा कि उसके साथ जेल में कुछ भी गलत नहीं हुआ है वह कोई जांच नहीं चाहती और ना ही किसी को बयान देना चाहती है कैदी का कहना है कि उसे इस मामले से दूर रखा जाए. मामले में सभी आरोप अफवाह हैं. इससे मीडिया में उसकी छवि खराब हो रही है

अदालत ने जताया है संदेह, सुनवाई के पूर्व बेल पर कहा था ये एक “डील” के जैसा
आपको बताते चले की महिला बंदी को वेकेशन कोर्ट से जमानत मिल गई थी इसके पश्चात जब रेगुलर कोर्ट में इसकी सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध हुआ और सुनवाई हुई तो मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में वेकेशन कोर्ट से जमानत मिलने पर आश्चर्य और संदेह जताते हुए कहा था कि मानो “यह एक डील जैसा है” और कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए रिपोर्ट तलब किया था.
हालात के पूर्व आदेश के अनुसार राजेंद्र इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस (RIMS) के द्वारा यौन उत्पीड़न फोरेंसिक जांच एवं न्यायिक जांच की रिपोर्ट सौंपी गई है. अदालत रिपोर्ट का अवलोकन कर आगामी 9 जुलाई को इस पर आदेश जारी कर सकती है.
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