Ranchi : राजधानी में आगजनी की हर घटना के बाद नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. हालात ऐसे बन गए हैं कि शहर में जब कहीं आग लगती है, तभी संबंधित संस्थानों की जांच शुरू होती है. हाल के दिनों में यही तस्वीर बार-बार सामने आई है. दिल्ली के एक होटल में आग लगने की घटना के बाद रांची में होटलों की चेकिंग शुरू हुई, तो वहीं दो दिन पहले लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में आग लगने के बाद रांची के कोचिंग संस्थानों की जांच शुरू कर दी गई. इससे साफ संकेत मिलता है कि नगर निगम की कार्रवाई किसी सुनियोजित सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि घटना के बाद की औपचारिक प्रतिक्रिया बनकर रह गई है.
जांच के नाम पर सिर्फ चेतावनी, न कार्रवाई न सख्ती
सबसे गंभीर बात यह है कि जांच के बाद भी नगर निगम की कार्रवाई सिर्फ चेतावनी तक सीमित रह जाती है. संबंधित संस्थानों को कह दिया जाता है कि वे अपनी सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करें, एंट्री-एग्जिट सिस्टम सुधारें, अग्निशमन उपकरण लगाएं या फायर सेफ्टी मानकों का पालन करें. लेकिन इसके बाद क्या होता है, इसकी निगरानी शायद ही कभी होती है. नतीजा यह कि कई संस्थान कुछ दिनों तक हलचल दिखाते हैं और फिर सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट जाता है. नगर निगम जांच करके अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है और संस्थान भी समझ जाते हैं कि मामला सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित है.

रांची में आज भी कई भवन ‘जोखिम क्षेत्र’ में
शहर में आज भी ऐसे कई होटल, कोचिंग सेंटर, कॉम्प्लेक्स और मॉल मौजूद हैं, जहां सुरक्षा मानकों की स्थिति बेहद खराब बताई जाती है. कई जगहों पर संकीर्ण प्रवेश और निकास मार्ग, अपर्याप्त आपातकालीन रास्ते, फायर फाइटिंग सिस्टम की कमी, और सबसे बड़ी बातकृऐसे बेसमेंट, जहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी तक नहीं पहुंच सकती. अगर किसी बहुमंजिला इमारत या भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक परिसर में आग लग जाए, तो राहत और बचाव कार्य शुरू होने से पहले ही बड़ा नुकसान हो सकता है. इसके बावजूद निगम नियमित, निष्पक्ष और कड़ी जांच नहीं कर रहा.
टैक्स वसूली में तेज, सुरक्षा देने में सुस्त?
लोगों में यह धारणा लगातार मजबूत हो रही है कि नगर निगम टैक्स वसूली, होल्डिंग और अन्य शुल्क लेने में तो सक्रिय रहता है, लेकिन जब बात नागरिकों की सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं और जवाबदेही की आती है, तो उसका रवैया बेहद ढीला नजर आता है.
ठोस कार्रवाई चाहिए
नगर निगम की मौजूदा कार्यशैली को देखकर लोगों के बीच यह भावना बन रही है कि प्रशासन किसी हादसे, मीडिया रिपोर्ट या सार्वजनिक दबाव के बाद थोड़ी हलचल दिखाता है, फिर मामला ठंडा पड़ते ही सब कुछ सामान्य हो जाता है. यह तरीका शहर की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक है.


