Hazriabagh: कटकमसांडी स्थित राजकीयकृत प्लस टू हाई स्कूल परिसर में वर्षों पुराने 21 यूकेलिप्टस (सफेदा) पेड़ों की प्रस्तावित कटाई को लेकर पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. इस निर्णय ने पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है. पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित डॉ. अमरनाथ पाठक ने पेड़ों की कटाई पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ये पेड़ वर्षों से छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों को छाया, स्वच्छ हवा तथा पर्यावरणीय संतुलन प्रदान कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब पूरे देश में वृक्षारोपण और हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, तब पुराने और विशाल वृक्षों की कटाई चिंताजनक है.
कटाई को बताया ‘डेथ वारंट’
डॉ. पाठक ने दावा किया कि पेड़ों की कटाई के लिए प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है और संबंधित प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. उन्होंने इसे पेड़ों का “डेथ वारंट” बताते हुए कहा कि जल्द ही इन्हें काटे जाने की तैयारी की जा रही है. पर्यावरणविदों का कहना है कि भले ही यूकेलिप्टस अधिक जल अवशोषित करने वाला वृक्ष माना जाता है, लेकिन इतने वर्षों से खड़े ये पेड़ क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. ये पेड़ ऑक्सीजन उपलब्ध कराने, धूल और प्रदूषण को कम करने तथा परिसर में हरियाली बनाए रखने में सहायक रहे हैं.

स्कूल की पहचान बन चुके हैं पेड़
स्थानीय लोगों के अनुसार ये पेड़ केवल वृक्ष नहीं, बल्कि स्कूल की पहचान का हिस्सा हैं. वर्षों से छात्र-छात्राएं और शिक्षक इनकी छाया में विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक गतिविधियों का हिस्सा बनते रहे हैं. ऐसे में इनकी कटाई से लोगों की भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं.
विकास के साथ हरियाली बचाने की मांग
पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है. उनका कहना है कि यदि किसी विकास कार्य के लिए पेड़ों की कटाई आवश्यक है तो उसके बदले पर्याप्त संख्या में नए पौधे लगाने और हरित क्षेत्र को संरक्षित रखने की स्पष्ट योजना भी बनाई जानी चाहिए. फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग अंतिम निर्णय से पहले सभी पहलुओं पर गंभीर विचार की मांग कर रहे हैं.


