Ranchi: धनबाद रिंग रोड मुआवजा घोटाले में गिरफ्तार जेपीएससी के परीक्षा नियंत्रक, पूर्व सीओ समेत 17 आरोपियों को जमानत के लिए अभी और इंतजार करना होगा. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मुकदमे में लागू धाराओं को लेकर स्पष्टता नहीं है. ऐसे में अदालत ने प्रतिवादियों से मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है.
मामले का खुलासा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने किया था. एक ओर आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (PC Act) के तहत मुकदमा दर्ज है, वहीं भूमि अधिग्रहण में कथित गड़बड़ी को लेकर एससी-एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. अदालत ने कहा कि सुनवाई किस अधिनियम के तहत आगे बढ़ेगी, इस पर स्पष्टता आवश्यक है.

अदालत ने मांगी तीन बिंदुओं पर स्पष्टता
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रतिवादियों से तीन प्रमुख बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा. इनमें यह तय करना शामिल है कि बहस पीसी एक्ट के तहत होगी या एससी-एसटी एक्ट के तहत. साथ ही यदि मामले में कोई पीड़ित पक्ष है तो उसे भी प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया गया है.
आरोपियों में शामिल कुमारी रत्नाकर के अधिवक्ता सिद्धार्थ सुधांशु ने कहा कि मामला कानूनी रूप से जटिल हो गया है. उन्होंने बताया कि पहले निचली अदालत में पीसी एक्ट के तहत चुनौती दी जाएगी, इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया जाएगा.
एसीबी ने 17 आरोपियों को किया था गिरफ्तार
गौरतलब है कि 9 जनवरी 2026 को धनबाद रिंग रोड के लिए हुए भूमि अधिग्रहण में सामने आए बहुचर्चित मुआवजा घोटाले में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. इसके लिए लगभग 10 विशेष टीमों का गठन कर विभिन्न स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई थी.
गिरफ्तार आरोपियों में पूर्व अंचल अधिकारी एवं झारखंड लोक सेवा आयोग के परीक्षा नियंत्रक विशाल कुमार, उदयकांत पाठक, मिथिलेश कुमार, सोमेश्वर शर्मा, अनुपमा कुमारी, शंकर प्रसाद दुबे, आलोक बरियार उर्फ जैकी लाल, सुशील प्रसाद, रविंद्र कुमार, कुमारी रत्नाकर, दिलीप गोप, बप्पी राय चौधरी, रामकृपाल गोस्वामी, अशोक कुमार महतो, उमेश महतो, अनिल कुमार सिंह, काली प्रसाद सिंह तथा अधिवक्ता सुशील कुमार शामिल हैं. वर्तमान में सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं. मामले की अगली सुनवाई 30 जून को निर्धारित की गई है.


