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News Wave Exclusive: झारखंड के 54 लाख बिजली उपभोक्ताओं को तगड़ा झटका: बिजली कंपनियों का घाटा भरेगी जनता, लागत घटेगी भी तो कम नहीं होगा आपका बिल

Ranchi: झारखंड के लगभग 54 लाख बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर से झटका लगने वाला है. अगर आने वाले दिनों में...

Ranchi: झारखंड के लगभग 54 लाख बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर से झटका लगने वाला है. अगर आने वाले दिनों में बिजली उत्पादन की लागत या पावर ट्रांसमिशन का खर्च कम भी होता है, तो भी आपके बिजली बिल में कोई कटौती नहीं की जाएगी. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने नियमों में बड़ा संशोधन कर आम जनता को मिलने वाली संभावित राहत पर पूरी तरह पानी फेर दिया है.

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क्या है नया नियम?

आयोग द्वारा जारी ‘प्रथम संशोधन नियमावली, 2026’ के तहत ‘प्रिंसिपल रेगुलेशंस 2025’ में एक नया क्लॉज (10.46 ए) जोड़ दिया गया है. इसके मुताबिक, अगर किसी महीने में ईंधन की कीमत, बिजली खरीद की लागत या ट्रांसमिशन चार्ज में कोई कमी आती है, तो उसका फायदा सीधे उपभोक्ताओं को (बिल घटाकर) नहीं दिया जाएगा.

जनता की जेब कटेगी, कंपनियों का घाटा भरेगा

इस नियम के पीछे आयोग का तर्क है कि यदि बिजली वितरण कंपनी (जैसे जेबीवीएनएल) का कोई पुराना घाटा बकाया है, तो लागत में होने वाली किसी भी कमी (बचत) का इस्तेमाल पहले उस घाटे की भरपाई के लिए किया जाएगा. यानी, जब तक बिजली कंपनियों का पुराना बैकलॉग खत्म नहीं होता, तब तक जनता को सस्ती बिजली का कोई लाभ नहीं मिलने वाला. यह नियम पूरे राज्य में लागू हो चुका है. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने यह फैसला विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 181 और 86 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए लिया है.

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