Ranchi: झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग ने राज्य के सभी कीटनाशक थोक विक्रेताओं, खुदरा दुकानदारों और सप्लायर्स को ‘कीटनाशी अधिनियम 1968’ और ‘कीटनाशी नियमावली 1971’ का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है. इस कानून का मुख्य उद्देश्य इंसानों, पालतू पशुओं और वन्य जीवों को जहरीले कीटनाशकों के अनियंत्रित इस्तेमाल और परिवहन से होने वाले जानलेवा जोखिमों से सुरक्षित रखना है. विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, कीटनाशकों के कारोबार से जुड़े सभी व्यवसायियों के लिए निम्नलिखित वैधानिक शर्तों को पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है. बिना वैध लाइसेंस के किसी भी कीटनाशक का निर्माण, भंडारण, प्रदर्शन, बिक्री या वितरण करना एक गंभीर कानूनन अपराध है होगा. किसी भी प्रकार की प्रतिबंधित, कूटनामी (नकली) या बिना रजिस्ट्रेशन वाली कृषि दवाओं को बेचना या स्टोर करना दंडनीय अपराध माना जाएगा. हर अधिकृत विक्रेता के पास निर्माता कंपनी द्वारा जारी ‘प्रिंसिपल सर्टिफिकेट’ होना चाहिए, जो यह साबित करे कि उसे वह उत्पाद बेचने का कानूनी अधिकार है.
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भंडारण में लापरवाही और जांच में बाधा डालने पर होगी सीधी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कीटनाशकों का भंडारण और परिवहन किसी भी परिस्थिति में इंसानों या पशुओं की खाद्य सामग्री के संपर्क में आने वाले स्थानों पर नहीं किया जाएगा. इसके साथ ही, दुकानदारों के लिए स्टॉक रजिस्टर (भंडार पंजी), कैश/क्रेडिट मेमो को निर्धारित प्रारूप में मेंटेन करना अनिवार्य होगा. हर महीने की बिक्री का पूरा विवरण फॉर्म-III में भरकर संबंधित अनुज्ञापन प्राधिकारी को भेजना होगा. निरीक्षण में सहयोग न करने पर जेल हो सकता है. क्षेत्र के कीटनाशी निरीक्षक को जांच में सहयोग देना, उन्हें स्टॉक दिखाना और सैंपल (नमूना) देना दुकानदारों का कानूनी दायित्व होगा, जांच प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने पर भी सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद्द, जुर्माना और कारावास दोनों संभव
सभी कारोबारियों से इस नियमावली का कड़ाई से अनुपालन करने का अनुरोध किया है. विभाग ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर धारा 29 के तहत तत्काल प्रभाव से दुकान का लाइसेंस रद्द किया जाएगा, साथ ही भारी जुर्माना और कारावास (जेल) या दोनों की कानूनी सजा भुगतनी पड़ सकती है.


