Ranchi: राजधानी रांची में शनिवार को मुहर्रम का जुलूस इस वर्ष अकीदत और देशभक्ति के अनूठे संगम के साथ निकला. वहीं जुलूस की एक और खूबसूरत तस्वीर विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों द्वारा पेश की गई. जुलूस के पूरे रास्ते में जगह-जगह लोगों ने शरबत और पेयजल की व्यवस्था कर प्रतिभागियों का स्वागत किया. यह दृश्य शहर की गंगा-जमुनी तहजीब को जीवंत कर रहा था. पूरे दिन चली यह शोभायात्रा शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई.

मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को दी श्रद्धांजलि
अखाड़ों के पारंपरिक प्रदर्शन के बीच भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को समर्पित एक मिसाइल मॉडल ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा. इस मॉडल पर शान से लहराता तिरंगा लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा. जुलूस में शामिल लोगों ने डॉ. कलाम को अपना प्रेरणा स्रोत बताते हुए कहा कि उनके वैज्ञानिक योगदान और सादगीपूर्ण जीवन को सदैव याद रखा जाएगा. यह पहल जुलूस को एक आधुनिक और प्रेरणादायक स्वरूप प्रदान कर रही थी.

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अनुशासन और भाईचारे के साथ निकला जुलूस
जुलूस पूरी तरह से अनुशासन और भाईचारे के साथ निकाला गया. इमाम हुसैन की शहादत की याद में आयोजित इस जुलूस ने शहर की फिजाओं को अकीदत के रंगों में सराबोर कर दिया. राजधानी की सड़कों पर “या हुसैन, या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं, जो इमाम हुसैन की कुर्बानी और उनके त्याग के प्रति मुस्लिम समुदाय की गहरी आस्था को दर्शा रही थीं.
युवा शक्ति का प्रदर्शन
जुलूस का मुख्य आकर्षण विभिन्न अखाड़ों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक कला और करतब रहे. ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच युवाओं ने अपनी कुशलता का प्रदर्शन किया, जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया. शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा. रांची के सिटी एसपी सहित आला पुलिस अधिकारी लगातार सड़कों पर निगरानी करते रहे. प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिस बल की कड़ी तैनाती की गई थी, ताकि यातायात सुचारु रहे और जुलूस शांतिपूर्वक संपन्न हो सके.


