Hyderabad: तेलंगाना सरकार ने पिछले दिनों राज्य के पुलिस और प्रशासनिक ढांचे में एक अभूतपूर्व और बड़ा फेरबदल किया है. सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी एक आधिकारिक आदेश के तहत कुल 7 सीनियर IPS अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियों की घोषणा की गई है. लेकिन इस पूरे फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय 1994 बैच की सीनियर IPS अधिकारी शिखा गोयल की नियुक्ति है जिन्हें राज्य का नया गृह सचिव बनाया गया है. प्रशासनिक परंपराओं के मुताबिक राज्यों में गृह सचिव का पद बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण होता है और इस पद पर आमतौर पर सीनियर IAS अधिकारियों को ही तैनात किया जाता है जो कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और सरकार के बीच एक सेतु का काम करते हैं. किसी IPS अधिकारी को इस पद पर बिठाना बेहद दुर्लभ माना जाता है. IPS अधिकारियों को IAS के पारंपरिक पदों जैसे गृह सचिव या अन्य सचिव पद पर नियुक्त करने का चलन बहुत आम नहीं है लेकिन भारतीय प्रशासनिक इतिहास में ऐसे कुछ गिने-चुने और बड़े उदाहरण पहले भी देखे गए हैं:
उत्तर प्रदेश में भी हो चुका है ऐसा प्रयोग
उत्तर प्रदेश (UP): देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी ऐसा प्रयोग हो चुका है. साल 2021 में योगी सरकार ने 1988 बैच के सीनियर IPS अधिकारी देवेंद्र सिंह चौहान को डीजी विजिलेंस के साथ-साथ प्रमुख सचिव गृह का अतिरिक्त प्रभार सौंपने पर विचार किया था. हालांकि वहां अक्सर IPS अधिकारियों को नागरिक उड्डयन या जेल जैसे विभागों में सचिव पद की जिम्मेदारी दी जाती रही है.

आंध्र प्रदेश में भी मिल चुकी हैं अहम जिम्मेदारियां
आंध्र प्रदेश: अविभाजित आंध्र प्रदेश और बाद में भी कुछ मौकों पर कानून-व्यवस्था को सख्त करने के लिए वरिष्ठ IPS अधिकारियों को गृह विभाग या मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा चुकी हैं. देश के अलग अलग राज्यों में IPS अधिकारियों को IAS अधिकारियों के लिए पारंपरिक माने जाने वाले पदो पर नियुक्ति के इस प्रयोग को बढ़ावा मिलता है या यह प्रयोग सफल नहीं हो पाता है, यह देखना काफी दिलचस्प होगा.


