Manish Bhardwaj
Ranchi : झारखंड कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा. विपक्ष पर हमलावर रहने वाली पार्टी अब खुद अपने ही नेताओं के निशाने पर है. संगठन के भीतर बढ़ती गुटबाजी, नेताओं की निष्क्रियता और जमीनी स्तर पर कमजोर होती पकड़ को लेकर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने ऐसा दर्द बयां किया, जो पार्टी की अंदरूनी तस्वीर को उजागर करता है. नेता का कहना है कि कांग्रेस इस वक्त भाजपा या झामुमो से कम और अपने ही नेताओं के खींचतान से ज्यादा जूझ रही है. पार्टी के भीतर हर कोई अपनी राजनीति चमकाने में लगा है. जबकि संगठन को मजबूत करने की चिंता करने वाला कोई नजर नहीं आता. वहीं, कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि कांग्रेस अब मैदान में नहीं, सिर्फ सोशल मीडिया पर लड़ रही है. फेसबुक और एक्स पर पोस्ट डालने में पार्टी सबसे आगे है, लेकिन जब बूथ पर कार्यकर्ता खड़ा करने की बात आती है तो कांग्रेस सबसे पीछे दिखाई देती है.

बूथ लेवल एजेंट बनाने में पार्टी दर्शक बनी
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (ैप्त्) प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि सबसे पहले कांग्रेस ने ही बूथ लेवल एजेंट (ठस्।) बनाने और उन्हें प्रशिक्षण देने का अभियान शुरू किया था. शुरुआत में ऐसा लगा कि पार्टी गंभीर है, लेकिन कुछ ही दिनों में पूरा अभियान ठंडा पड़ गया. नतीजा यह हुआ कि भाजपा और झामुमो इस मामले में कांग्रेस से काफी आगे निकल गए और कांग्रेस फिर से दर्शक बनकर रह गई.
जिस इलाके में विधायक नहीं वहां पार्टी राम भरोसे
कार्यकर्ताओं ने कहा कि पार्टी में अब काम कम और कैमरा ज्यादा हो गया है. कई नेता जनता के बीच कम और सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय रहते हैं. संगठन खड़ा करने के बजाय अपनी तस्वीरें और बयान वायरल कराने की होड़ मची हुई है. इसका खामियाजा पार्टी को जमीनी स्तर पर भुगतना पड़ रहा है. कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि जिन इलाकों में कांग्रेस के विधायक हैं. वहां किसी तरह संगठन सांस ले रहा है, लेकिन जहां विधायक नहीं हैं, वहां पार्टी का हाल “राम भरोसे” है. न नेता पहुंचते हैं, न संगठनात्मक गतिविधियां होती हैं और न ही कार्यकर्ताओं की सुध ली जाती है.
पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठा रहे कार्यकर्ता
कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता अब खुद ही पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठाने लगे है. कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब नेता ही एक-दूसरे को स्वीकार नहीं कर पा रहे, तो कार्यकर्ता किसके पीछे खड़ा होंगे. यही वजह है कि संगठन लगातार कमजोर होता जा रहा है.
ALSO READ : झारखंड पुलिस : CID की पहल पर अब सभी 24 जिलों में ‘मिशन वात्सल्य पोर्टल’ से होगी लापता बच्चों की तलाश


