Hazaribagh : ऐतिहासिक हूल दिवस के पावन अवसर पर मंगलवार को स्थानीय सिद्धो-कान्हू चौक पर सरना समिति की ओर से एक गरिमामयी श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस गौरवपूर्ण दिवस पर समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रबुद्ध जनों और भारी संख्या में जुटे युवाओं ने महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी सिद्धो और कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. चौक परिसर वीर शहीदों के जयकारों से गूंज उठा और वहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति ने इन अमर नायकों के दिखाए मार्ग पर चलने तथा समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया.
आदिवासी अस्मिता और ऐतिहासिक संघर्ष का प्रतीक है हूल दिवस
कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष महेंद्र बैंक ने अपने विचार साझा किए. उन्होंने अत्यंत गर्व के साथ कहा कि हूल दिवस केवल कैलेंडर की एक तारीख या कोई साधारण स्मृति दिवस नहीं है, बल्कि यह हमारे आदिवासी समाज के स्वाभिमान, अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और आजादी के लिए किए गए उस ऐतिहासिक महासंग्राम का प्रतीक है जिसने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी. उन्होंने आगे कहा कि सिद्धो-कान्हू ने तत्कालीन अत्याचारी ब्रिटिश शासन और स्थानीय शोषकों के खिलाफ जिस अदम्य साहस, वीरता और अद्भुत एकजुटता के साथ इस जन-आंदोलन का नेतृत्व किया था, वह गाथा आज भी हमारे समाज के रग-रग में प्रेरणा का संचार करती है.

युवाओं से अपनी जड़ों, संस्कृति और अधिकारों को पहचानने की अपील
केंद्रीय अध्यक्ष महेंद्र बैंक ने आज की युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए विशेष आह्वान किया. उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में युवाओं के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे अपने गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति और पुरातन परंपराओं को गहराई से जानें व समझें. समाज में शिक्षा और जागरूकता का प्रसार करना ही इन शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. हूल दिवस हमें यह सिखाता है कि अन्याय और किसी भी प्रकार के शोषण के विरुद्ध हमेशा लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद रखनी चाहिए तथा समाज में आपसी भाईचारे और एकता को मजबूत करना चाहिए. इस ऐतिहासिक महत्व के कार्यक्रम के दौरान वीर शहीद सिद्धो-कान्हू के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए उनके महान आदर्शों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की बात कही गई. कार्यक्रम को सफल बनाने में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई. इस पावन अवसर पर छात्र संघ के अध्यक्ष सुनील उरांव, रमेश हेम्ब्रम, सुनील लकड़ा, बंधन एक्का, पवन तिग्गा, सुधीर बास्के और रति लिंडा मुख्य रूप से उपस्थित रहे. इनके साथ ही सरना समिति के कई अन्य केंद्रीय व स्थानीय पदाधिकारी, सदस्य, प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण जनता ने उपस्थित रहकर शहीदों की विरासत को अक्षुण्ण रखने का संकल्प लिया.
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