Ranchi: झारखंड में प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज ने बड़ा आंदोलन छेड़ने का फैसला किया है. रांची में विभिन्न आदिवासी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों की बैठक हुई, जिसमें परिसीमन के संभावित प्रभावों और आदिवासियों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा को लेकर विस्तृत रणनीति बनाई गई. बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया, कि पूरे झारखंड में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा और अगस्त 2026 में रांची में ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ आयोजित की जाएगी. इस रैली में राज्य के सभी 24 जिलों से लाखों आदिवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है.
हर जिले में बनेगी टीम, गांव-गांव पहुंचेगा जागरूकता अभियान
आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए कई समितियों का गठन किया गया. प्रचार-प्रसार और मीडिया समन्वय के लिए पांच राज्यस्तरीय प्रवक्ताओं की नियुक्ति, सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार के लिए आईटी सेल तथा पूरे आंदोलन की निगरानी के लिए वार रूम बनाने का फैसला लिया गया. इसके अलावा सभी 24 जिलों में जिला समन्वयक और जिला प्रवक्ता नियुक्त किए जाएंगे. पूरे राज्य में जागरूकता रथ भी निकाले जाएंगे, जो गांवों और पंचायतों तक पहुंचकर लोगों को परिसीमन के संभावित प्रभाव, संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर जागरूक करेंगे.

राष्ट्रपति, राज्यपाल और राहुल गांधी से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति, राज्यपाल, केंद्रीय कानून मंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से मुलाकात करेगा. प्रतिनिधिमंडल झारखंड के आदिवासी समाज की चिंताओं और मांगों को उनके सामने रखेगा तथा पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की विशेष स्थिति और आदिवासियों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप की मांग करेगा.
‘अधिकारों से समझौता नहीं’
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया में आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और ऐतिहासिक हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से चलाया जाएगा तथा समाज के सभी वर्गों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा.


