Giridih: मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत तिसरी प्रखंड में बकरी वितरण के दौरान भारी अनियमितता के आरोप सामने आए हैं. योजना के तहत 17 लाभुकों के बीच बकरियों का वितरण किया गया, लेकिन वितरण स्थल पर ही लाभुकों ने संख्या में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया. इससे सरकारी योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.
अलग-अलग लाभुकों को अलग-अलग संख्या में मिलीं बकरियां
लाभुकों का आरोप है कि योजना के नियम के अनुसार प्रत्येक चयनित लाभुक को 4 मादा और 1 नर बकरी मिलनी थी, लेकिन कई लोगों को केवल 3 मादा और 1 नर बकरी ही दी गई. वहीं कुछ लाभुकों को 5 मादा और 2 नर बकरियां मिलने की बात भी सामने आई. अलग-अलग लाभुकों को अलग-अलग संख्या में बकरियां मिलने से पूरे वितरण पर सवाल खड़े हो गए हैं. वहीं, मामले की सूचना मिलते ही झामुमो प्रखंड अध्यक्ष रिंकू बरनवाल मौके पर पहुंचे और वितरण प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग ने योजना की निर्धारित गाइडलाइन का पालन नहीं किया. साथ ही बकरियों की गुणवत्ता और खरीद मूल्य पर भी सवाल उठाते हुए कहा, कि बाजार में ऐसी बकरियां करीब 2000 से 2500 रुपये में उपलब्ध हैं, जबकि विभाग द्वारा लगभग 4500 रुपये प्रति बकरी की खरीद दर्शाई जा रही है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए उपायुक्त से शिकायत करने की बात कही.

पशु चिकित्सक ने आरोपों को किया खारिज
हालांकि, पशु चिकित्सक राम कृष्ण बाउरी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, कि जिन लाभुकों को कम बकरियां मिली हैं, उनकी अनुदान राशि कम स्वीकृत हुई थी या उन्हें पूरी राशि प्राप्त नहीं हुई थी. इसी आधार पर बकरियों की संख्या तय की गई. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी वितरित बकरियां ब्लैक बंगाल नस्ल की हैं और उनकी कीमत लगभग 4500 रुपये प्रति बकरी है. अब लाभुकों की शिकायत और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत बकरियों की खरीद, मूल्य निर्धारण और वितरण प्रक्रिया जांच के दायरे में आ गई है. यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी योजना में गंभीर अनियमितता का मामला साबित हो सकता है.
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