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बोकारो: चौकीदार-दफादारों को महीनों से नहीं मिला वेतन, भुखमरी की स्थिति के बीच उग्र आंदोलन की चेतावनी

Bokaro: गोमिया और चास अंचल के अधिकारियों की मनमानी पर भड़का दफादार चौकीदार पंचायत, उपायुक्त से सीओ और नाजिर का वेतन रोकने...

बोकारो
उग्र आंदोलन की चेतावनी

Bokaro:  गोमिया और चास अंचल के अधिकारियों की मनमानी पर भड़का दफादार चौकीदार पंचायत, उपायुक्त से सीओ और नाजिर का वेतन रोकने की मांग
झारखंड राज्य दफादार चौकीदार पंचायत की बोकारो जिला कमेटी ने जिले के गोमिया और चास अंचल में कार्यरत चौकीदार-दफादारों को महीनों से वेतन न मिलने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है. पंचायत के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण दयाल सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि गोमिया अंचल के चौकीदार-दफादारों को पिछले 5 माह से और चास अंचल के कर्मियों को 4 माह से वेतन नहीं मिला है. वेतन के अभाव में इन कर्मचारियों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है. पैसों की तंगी के कारण उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी छूटने की कगार पर पहुंच गई है. पीड़ित कर्मी जब भी अंचल पदाधिकारी (सीओ) और नाजिर से मुलाकात करते हैं, तो उन्हें जल्द भुगतान का खोखला आश्वासन थमा दिया जाता है, जिसके कारण यह समस्या लगातार खिंचती जा रही है.

सरकारी आवंटन के बावजूद अधिकारियों की मनमानी से अटका भुगतान

संगठन ने स्पष्ट किया है कि वेतन न मिलने के पीछे बजट की कोई कमी नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है. विदित हो कि झारखंड सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के पत्रांक 09, 13 अप्रैल 2026 के माध्यम से बोकारो सहित राज्य के सभी जिलों के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारियों को चौकीदार-दफादारों के वेतन भुगतान हेतु पर्याप्त आवंटन पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है. नियमानुसार अंचल पदाधिकारी इस प्रक्रिया के मुख्य निकासी पदाधिकारी होते हैं, और अंचल के नाजिर वेतन विपत्र (बिल) तैयार करते हैं. गोमिया और चास अंचल के सीओ और नाजिर की इसी मनमानी के चलते भुगतान अटका हुआ है, जबकि बोकारो जिले के ही अन्य अंचलों जैसे चंदनकियारी, चंद्रपुरा, नावाडीह, पेटरवार, कसमार और जरीडीह में सभी चौकीदार-दफादारों को नियमित वेतन का भुगतान किया जा चुका है.

उपायुक्त से सीओ का वेतन रोकने और घेराव करने की मांग

झारखंड राज्य दफादार चौकीदार पंचायत ने बोकारो के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है. संगठन की मांग है कि जब तक गोमिया और चास अंचल के पीड़ित चौकीदार-दफादारों का पूरा बकाया वेतन भुगतान नहीं हो जाता, तब तक इन दोनों अंचलों के अंचल पदाधिकारियों और नाजिरों के स्वयं के वेतन भुगतान पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि लापरवाही बरतने वाले इन अधिकारियों को सबक मिल सके और झारखंड सरकार की छवि धूमिल होने से बचे. संगठन ने जिला प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि चालू सप्ताह के भीतर सभी कर्मियों का वेतन भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो बोकारो जिला कमेटी उपायुक्त कार्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव करने के लिए मजबूर होगी. इस दौरान होने वाले किसी भी आंदोलन या अप्रिय घटना की समस्त जवाबदेही बोकारो जिला प्रशासन की होगी.

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एसीपी-एमएसीपी का लाभ और 10 वर्षों के बकाया वर्दी भत्ते पर उठाई आवाज

वेतन विसंगति के अलावा, प्रेस विज्ञप्ति में चौकीदार-दफादारों की अन्य लंबित मांगों को भी प्रमुखता से उठाया गया है. प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण दयाल सिंह ने बताया कि बोकारो जिला के चौकीदार-दफादारों को एसीपी (ACP) और एमएसीपी (MACP) का लाभ देने के लिए सेवा संपुष्टि (सर्विस कन्फर्मेशन) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते कर्मियों को अब तक इसका कोई लाभ नहीं मिल सका है. इसके साथ ही, पिछले लगभग 10 वर्षों से जिले के चौकीदार-दफादारों को वर्दी भत्ता नहीं दिया गया है, जबकि नियमानुसार यह भत्ता प्रतिवर्ष मिलना अनिवार्य है. संगठन ने उपायुक्त से मांग की है कि जिन कर्मियों की सेवा संपुष्टि के बाद सेवा पुस्तिका जिला सामान्य शाखा में आ चुकी है, उन्हें अविलंब वित्तीय लाभ दिए जाएं और नए-पुराने सभी चौकीदार-दफादारों को पिछले 10 वर्षों का बकाया जोड़कर वर्दी भत्ते का एकमुश्त भुगतान किया जाए.

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