Ranchi : झारखंड में इस साल मानसून की चाल ने किसानों की नींद उड़ा दी है. जून-जुलाई की दहलीज पर खड़ा प्रदेश का किसान अब सूखे के साये में जीने को मजबूर है. राज्य के अधिकांश जिलों में बादलों ने धोखा दिया है. मानसून की उम्मीद में धान की बिचड़े तैयार कर चुके अन्नदाता अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, लेकिन बारिश की कमी ने खेती-किसानी की कमर तोड़ दी है. आंकड़ों पर नजर डालें, तो राज्य में सामान्य वर्षापात के मुकाबले वास्तविक बारिश 46 फीसदी कम दर्ज की गई है.
216 मिलीमीटर के सामान्य वर्षापात के मुकाबले मात्र 117.5 मिलीमीटर ही बारिश
पूरे झारखंड में अब तक 216 मिलीमीटर के सामान्य वर्षापात के मुकाबले मात्र 117.5 मिलीमीटर बारिश हुई है. जो सामान्य से 46 फीसदी कम है. सबसे चिंताजनक स्थिति साहिबगंज जिले की है. जहां बारिश की कमी 99 फीसदी तक पहुंच गई है. वहीं, गढ़वा में 89 फीसदी और गोड्डा में 81 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. जिससे इन इलाकों में सुखाड़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं.

किसानों पर दोहरी मार
खेती के इस मुख्य सीजन में बारिश की इस बेरुखी ने धान की रोपनी को बुरी तरह प्रभावित किया है. खेतों में दरारें पड़ चुकी हैं और पानी की कमी के कारण फसलें मुरझाने लगी हैं. सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण छोटे और सीमांत किसान सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय नहीं होता है, तो न केवल खरीफ फसल बल्कि राज्य की खाद्य सुरक्षा पर भी गहरा असर पड़ सकता है.
भारी कमी वाले जिले
कोडरमा (75 फीसदी), चतरा (71 फीसदी), पाकुड़ (66 फीसदी), लोहरदगा (64 फीसदी), खूंटी (62 फीसदी), रामगढ़ (59 फीसदी), सरायकेला-खरसावां (59 फीसदी), बोकारो (60 फीसदी) और हजारीबाग (58 फीसदी) में मानसून पूरी तरह से नदारद रहा है.
थोड़ी राहत वाले जिले
राज्य में तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति दुमका की रही है. जहां कमी मात्र 8 फीसदी है. वहीं रांची (16 फीसदी), सिमडेगा (19 फीसदी) और जामताड़ा (29 फीसदी) में भी बारिश के आंकड़े अन्य जिलों की तुलना में थोड़े संतोषजनक हैं.
ALSO READ : बाबूलाल मरांडी का आरोप: ‘5 महीने से मानदेय को तरस रहे 58 हजार NHM कर्मी’


