Hazaribagh : राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के चौपारण क्षेत्र में प्रतिबंधित मांगुर मछली के कथित अवैध कारोबार पर अब भी प्रभावी रोक नहीं लग सकी है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम होते ही पश्चिम बंगाल से पिकअप व अन्य छोटे मालवाहक वाहनों में बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित मांगुर मछलियां लोड कर चौपारण के रास्ते बिहार सहित अन्य राज्यों की ओर भेजी जाती हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और रात के अंधेरे का फायदा उठाकर बेखौफ तरीके से कारोबार संचालित किया जा रहा है. उनका आरोप है कि जिम्मेदार विभागों की ढीली निगरानी के कारण कारोबारियों के हौसले लगातार बुलंद हैं.
विधानसभा तक पहुंचा मामला, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं
प्रतिबंधित मांगुर मछली के कथित अवैध कारोबार का मुद्दा वर्ष 2025 में झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में भी उठ चुका है. बरही विधानसभा क्षेत्र के विधायक मनोज कुमार यादव ने सदन में सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल से चौपारण होकर जीटी रोड के रास्ते बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित मांगुर मछली की तस्करी की जा रही है. उन्होंने नियमित जांच अभियान चलाने, चेकपोस्टों पर निगरानी बढ़ाने तथा इस कारोबार में संलिप्त लोगों और लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की थी. सरकार की ओर से कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं दिखा है.

पर्यावरण और जैव विविधता पर खतरा, सख्त कार्रवाई की मांग
विशेषज्ञों के अनुसार पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय जलीय जैव विविधता की सुरक्षा को देखते हुए मांगुर मछली की कुछ विदेशी प्रजातियों के पालन, परिवहन और व्यापार पर प्रतिबंध लगाया गया है. इसके बावजूद अधिक मुनाफे के लालच में नियमों की अनदेखी कर इस कारोबार के जारी रहने की शिकायतें मिल रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन नियमित वाहन जांच, चेकपोस्टों पर कड़ी निगरानी और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, तो इस कथित अवैध नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है.


