Ranchi: पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता की डिस्चार्ज पिटीशन पर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश राजेश शंकर ने सुनवाई की. प्रार्थी के अधिवक्ता के अनुरोध पर एक सप्ताह का समय दिया गया. दरअसल पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता ACB की विशेष अदालत से डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किए जाने के बाद झारखंड हाईकोर्ट की शरण में हैं. मालूम हो कि 2003-05 में बीज और कृषि उपकरण की खरीद आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किए बिना मनपसंद कंपनी से की गई थी, जिसकी जांच एसीबी ने की थी. उस जांच में 46 करोड़ 10 लाख घोटाले का मामला सामने आया था. इसको लेकर साल 2009 में निगरानी थाना में कांड संख्या 11/2009 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. इस घोटाले में तत्कालीन कृषि मंत्री सत्यानंद भोक्ता, पूर्व मंत्री नलिन सोरेन, तत्कालीन कृषि सचिव वी. जयराम, निस्तार मिंज, दिलीप गाड़ोदिया समेत अन्य को आरोपी बनाया गया है. सभी पर सरकारी धन का दुरुपयोग कर घोटाला करने का आरोप है. मामले में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है.
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