Hazaribagh : कटकमदाग प्रखंड कार्यालय में अंचल कार्यालय की एक और बड़ी लापरवाही और गंभीर कारनामा सामने आया है. मौजा जबरा (नूतन नगर) के रहने वाले स्वर्गीय काशीनाथ गोस्वामी के इकलौते पुत्र विजय कुमार गोस्वामी ने अंचल कार्यालय के डिजिटल रिकॉर्ड और म्यूटेशन के खेल पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं. विजय ने कहा कि उनके पिता द्वारा साल 1979 में खरीदी गई 21 डिसमिल पैतृक जमीन सरकारी रिकॉर्ड में ऑनलाइन कटकर मात्र 13.5 डिसमिल बची है. गायब हुई 7.5 डिसमिल जमीन को लेकर पीड़ित अब न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है.
1979 से कट रही थी रसीद, ऑनलाइन रिकॉर्ड में गायब हो गया रकबा
विजय कुमार गोस्वामी ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय काशीनाथ गोस्वामी ने साल 1979 में मौजा जबरा के तीन सगे भाइयों-बिष्णु महतो, खेदन महतो और चिन्तामन महतो से पुराना खाता संख्या 3 (हाल खाता 11) और प्लॉट नंबर 923 के अंतर्गत कुल 21 डिसमिल जमीन खरीदी थी. खरीद के बाद से ही जमीन का बकायदा म्यूटेशन हुआ और सालों से उसकी सरकारी रसीद भी कटती आ रही थी. लेकिन जब से डिजिटल व्यवस्था के तहत रिकॉर्ड ऑनलाइन चढ़े हैं, तब से इस प्लॉट में बड़ा खेल कर दिया गया है. ऑनलाइन रिकॉर्ड में अब 21 डिसमिल की जगह मात्र 13.5 डिसमिल जमीन ही दिखाई दे रही है.

किसी ने जमीन नहीं बेची तो डिजिटल रिकॉर्ड में कमी कैसे
विजय कुमार गोस्वामी ने अंचल की कार्यप्रणाली पर कड़ा रोष जताते हुए कहा कि वे अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं. उनके पिता, माता या उन्होंने खुद कभी भी इस जमीन का एक हिस्सा भी किसी को नहीं बेचा है. जब जमीन की कोई बिक्री ही नहीं हुई, तो अंचल कार्यालय के रिकॉर्ड में 7.5 डिसमिल जमीन किसके नाम पर ट्रांसफर कर दी गई और उसकी रसीद कैसे काट दी गई, यह एक बड़ा रहस्य है. आज जब वे लगान रसीद कटाने अंचल कार्यालय जाते हैं, तो कर्मचारी उन्हें साफ कह देते हैं कि उनके नाम पर सिर्फ 13.5 डिसमिल जमीन ही बची है. पीड़ित ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि ब्लॉक और अंचल कार्यालय के भीतर रैयतों की जमीनों के साथ बड़ा तमाशा और हेरफेर का खेल चल रहा है.
न्याय के लिए आरटीआई, एलआरडीसी और डीसी कार्यालय का चक्कर
विजय कुमार गोस्वामी ने बताया कि इस पूरे फर्जीवाड़े की सच्चाई सामने लाने के लिए उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत अंचल कार्यालय से दस्तावेज मांगे हैं. इसके साथ ही उन्होंने भूमि सुधार उप समाहर्ता के पास भी अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई है और अब पूरे मामले को हजारीबाग उपायुक्त के समक्ष ले जाने की तैयारी में हैं. पीड़ित ने मांग की है कि उनके पिता के नाम की पूरी 21 डिसमिल जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन दुरुस्त किया जाए और इस हेरफेर में शामिल दोषियों पर कार्रवाई हो.


