Hazaribagh: जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत स्वीकृत आवासों का निर्माण बालू की कमी के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है. राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा 15 अक्टूबर तक बालू उठाव पर रोक लगाए जाने के बाद निर्माण कार्यों की गति काफी धीमी पड़ गई है. इसका सीधा असर हजारों लाभुकों पर पड़ा है, जो समय पर अपना आवास पूरा नहीं कर पा रहे हैं.
वर्ष 2024-25 के लिए जिले के 16 प्रखंडों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 11,257 आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इनमें अब तक केवल 2,744 आवास पूर्ण हो सके हैं, जबकि 8,513 आवास अभी भी अधूरे हैं. प्रशासन निर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन बालू की उपलब्धता सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है.

लाभुकों की परेशानी बढ़ी
ग्रामीण क्षेत्रों के लाभुकों का कहना है कि मकान निर्माण के लिए बालू सबसे आवश्यक सामग्री है। बालू नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य रुक-रुक कर चल रहा है. कई लाभुकों ने पहली या दूसरी किस्त की राशि प्राप्त कर ली है, लेकिन निर्माण पूरा नहीं कर पा रहे हैं. लाभुकों का आरोप है कि प्रशासन समय पर आवास पूरा करने का दबाव तो बना रहा है, लेकिन निर्माण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी पहल नहीं हो रही है. उनका कहना है कि बालू की कमी से निर्माण लागत भी बढ़ गई है, जिससे तय बजट में मकान बनाना कठिन हो गया है.
जानकारी के अनुसार कई प्रखंडों में प्रखंड विकास पदाधिकारियों द्वारा समय पर निर्माण पूरा नहीं करने वाले लाभुकों के विरुद्ध सर्टिफिकेट केस दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इससे लाभुकों में चिंता का माहौल है. उनका कहना है कि जब आवश्यक निर्माण सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो निर्धारित समय में कार्य पूरा करना संभव नहीं है.
बालू संकट का व्यापक असर
बालू की कमी का असर केवल प्रधानमंत्री आवास योजना तक सीमित नहीं है। 15वें वित्त आयोग की योजनाओं, निजी मकान निर्माण तथा अन्य सरकारी और गैर-सरकारी विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। बिहार के कुछ क्षेत्रों से सीमित मात्रा में बालू उपलब्ध हो रही है, लेकिन अधिक कीमत के कारण आम लोगों और लाभुकों का खर्च बढ़ गया है.
प्रशासन का कहना है कि समय पर आवास निर्माण पूरा कराना प्राथमिकता है. हालांकि लाभुकों का मानना है कि जब तक निर्माण सामग्री की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक निर्धारित लक्ष्य हासिल करना मुश्किल रहेगा. आंकड़ों के अनुसार जिले में चलकुशा प्रखंड की स्थिति सबसे चिंताजनक है. यहां स्वीकृत 207 आवासों में से अब तक केवल 52 आवास ही पूर्ण हो सके हैं, जो जिले में सबसे कम प्रगति है.
प्रखंडवार आवास निर्माण की स्थिति
कटकमसांडी – 1,335 में 280 पूर्ण
बड़कागांव -1,088 में 257 पूर्ण
विष्णुगढ़ – 1,111 में 431 पूर्ण
चुरचू – 656 में 95 पूर्ण
चौपारण – 645 में 95 पूर्ण
डाड़ी – 711 में 66 पूर्ण
इचाक – 1,143 में 264 पूर्ण
कटकमदाग – 581 में 118 पूर्ण
दारू – 496 में 217 पूर्ण
केरेडारी -997 में 256 पूर्ण
पदमा – 563 में 134 पूर्ण
सदर – 660 में 178 पूर्ण
टाटीझरिया -335 में 95 पूर्ण
बरही -121 में 57 पूर्ण
बरकट्ठा – 596 में 149 पूर्ण
चलकुशा – 207 में 52 पूर्ण
समाधान की मांग तेज
लाभुकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए बालू की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु शीघ्र प्रभावी कदम उठाए जाएं. उनका कहना है कि यदि बालू संकट का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो प्रधानमंत्री आवास योजना के लक्ष्य को समय पर पूरा करना मुश्किल होगा और हजारों गरीब परिवारों का पक्का घर पाने का सपना अधूरा रह जाएगा.
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