Ranchi: अपनी मांगों को लेकर सचिवालय संघ के सदस्य आंदोलित हैं. इस क्रम में पहले तो वे मुख्यमंत्री से मिलने गए. लेकिन मुलाकात नहीं होने की स्थिति में सभी कर्मी प्रोजेक्ट भवन पहुंच गए. जहां उन्होंने कार्मिक सचिव के कार्यालय का घेराव किया. घेराव के दौरान सभी ने नारेबाजी की. Go Back और कार्मिक सचिव हाय-हाय जैसे नारे भी लगाए गए. पूरे मामले पर अब सचिवालय कर्मियों की आगे की रणनीति क्या होगी, उस पर Newswave Jharkhand ने संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार से बात की. उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर आगे की रणनीति तय करने के लिए संभावना है कि 12 जुलाई को आमसभा का आयोजन किया जाए. आमसभा में आगे की रणनीति तय की जाएगी. अगर इस महीने हमारी मांगों को लेकर सरकार फैसला नहीं लेती है, तो अगस्त से सभी सचिवालय कर्मी हड़ताल पर चले जाएंगे. उन्होंने कहा कि हालांकि इन सभी बातों का फैसला आमसभा में लिया जाएगा. अगर सभी सचिवालय कर्मी हड़ताल पर चले जाएंगे, तो झारखंड सरकार के सारे कामकाज पर ब्रेक लग जाएगा. सरकार को इससे काफी क्षति हो सकती है.
विवाद की जड़, संकल्प में संशोधन और प्रोन्नति का गणित
इस पूरे विवाद की धुरी कार्मिक विभाग का संकल्प संख्या-3286 है. पूर्व में इस संकल्प के तहत राज्य की विभिन्न सेवाओं के कर्मियों और अधिकारियों की प्रोन्नति (Promotion) के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की गई थी. सचिवालय सेवा के अधिकारियों ने इसी संकल्प का हवाला देते हुए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. अदालत ने भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कार्मिक विभाग को संकल्प के अनुरूप प्रोन्नति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे. लेकिन, 9 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई से ठीक पहले, राज्य सरकार ने कैबिनेट के माध्यम से संकल्प में ही संशोधन कर दिया. इस संशोधन के जरिए सचिवालय सेवा को उस दायरे से बाहर कर दिया गया, जिसके तहत उन्हें लाभ मिलने की उम्मीद थी. नतीजतन, अधिकारियों के लिए प्रोन्नति की अवधि 8 वर्ष से बढ़कर सीधे 16 वर्ष हो गई है. यानी, अब एक सचिवालय अधिकारी को पदोन्नति पाने के लिए दोगुना इंतजार करना होगा.

भेदभाव और करियर पर संकट का तर्क
सचिवालय सेवा संघ का तर्क है कि सरकार का यह कदम न केवल विरोधाभासी है, बल्कि भेदभावपूर्ण भी है. संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासनिक पदानुक्रम में सचिवालय सेवा के अधिकारियों के साथ यह रवैया उनके करियर के विकास को अवरुद्ध करेगा. उनका मुख्य तर्क यह है कि इस नए नियम के लागू होने के बाद, उनसे कम ग्रेड पे (Grade Pay) वाले अन्य विभागों के कर्मी या अधिकारी उनसे पहले प्रोन्नति प्राप्त कर लेंगे, जबकि मूल रूप से उच्च पद या समान स्तर पर काम करने वाले सचिवालय अधिकारियों को दोगुने समय तक प्रतीक्षा करनी होगी. संघ के अनुसार, यह ‘समान काम के लिए समान अवसर’ के सिद्धांत के विरुद्ध है और इससे कार्यबल का मनोबल गिरेगा.


