Ranchi : झारखंड वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने आधिकारिक रूप से वन अनुसूची दर तालिका SRO-2026 जारी कर दी है. इसे राज्य के लाखों ग्रामीणों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों के लिए एक आर्थिक सुरक्षा कवच के रूप में तैयार किया गया है. जो सीधे तौर पर प्रकृति से जुड़े हैं. विभाग ने इस बार नई तकनीकों, आधुनिक नर्सरी और मुख्यमंत्री जन वन योजना जैसी महत्वाकांक्षी पहलों को केंद्र में रखते हुए दरों का निर्धारण किया है.
अब हरियाली का मतलब पक्की कमाई
पिछली व्यवस्थाओं की विसंगतियों को दरकिनार करते हुए, SRO – 2026 का सबसे अहम पहलू इसका ‘व्यावहारिक और लाभकारी’ ढांचा है. सरकार ने इस बार निजी भूमि पर वृक्षारोपण से लेकर हाई-टेक नर्सरी तक के लिए दरों को बेहद आकर्षक बनाया है. अब किसान केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहेंगे. मुख्यमंत्री जन वन योजना के तहत वे अपनी निजी भूमि पर फलदार और इमारती लकड़ियों के पौधे लगाकर न केवल प्रकृति को समृद्ध करेंगे, बल्कि अपने परिवार के लिए एक सुनिश्चित आय का जरिया भी बनाएंगे.

जल संचयन और वन पुनरुद्धार
झारखंड जल संचयन योजना के तहत डीप कंटूर ट्रेंच , वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच और ‘डोभा’ निर्माण की नई और संशोधित दरें जारी की गई हैं. ये निर्माण कार्य न केवल वनों की नमी बनाए रखेंगे, बल्कि भू-जल स्तर को बढ़ाने में भी गेम-चेंजर साबित होंगे.वनीकरण को जल संरक्षण के साथ जोड़कर एक ‘इको-सिस्टम’ तैयार करने का निर्णय लिया है.
अवक्रमित वनों का कायाकल्प
राज्य के ऐसे वन क्षेत्र जो समय के साथ अपनी चमक खो चुके हैं, उनके लिए SRO – 2026 में पारिस्थितिक पुनर्वस्थापन का विशेष प्रावधान है. 1100 पौधे प्रति हेक्टेयर की दर से इन क्षेत्रों का कायाकल्प किया जाएगा. यह कदम न केवल राज्य के वन क्षेत्र को बढ़ाएगा, बल्कि जैव-विविधता को भी पुनर्जीवित करेगा. नई दर तालिका में सुरक्षा को लेकर भी सख्त प्रावधान हैं. चैन लिंक फेंसिंग से लेकर एंगल आयरन पोस्ट तक की दरों को अद्यतन किया गया है, ताकि रोपित पौधों को मवेशियों और बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखा जा सके.
आधुनिक नर्सरी : भविष्य की नींव
SRO – 2026 का एक बड़ा हिस्सा नर्सरी प्रबंधन पर केंद्रित है. विभाग ने 50,000 पौधों से लेकर 1 लाख पौधों तक की क्षमता वाली स्थायी नर्सरियों के लिए स्पष्ट दरें निर्धारित की हैं. हाई-टेक नर्सरी के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. इसमें नर्सरी प्रबंधन में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समावेश किया गया है.
मुख्यमंत्री जन वन योजना
• फलदार पौधों का महत्व : निजी भूमि पर प्रति एकड़ 160 पौधों के मानक को प्राथमिकता दी गई है.
• इमारती लकड़ी का भविष्य : जहां भविष्य में आर्थिक लाभ की संभावना है, वहां 445 पौधे प्रति एकड़ तक की दरें तय की गई हैं.
• मिश्रित रोपण : किसानों को विकल्प दिया गया है कि वे फलदार और इमारती दोनों प्रकार के पौधों का चयन करें. जिससे उनकी आय का स्रोत भी विविधतापूर्ण रहे.
निजी भूमि पर वृक्षारोपण
• फलदार पौधे : प्रति एकड़ 160 पौधों का मानक (न्यूनतम दूरी के साथ).
• इमारती पौधे : प्रति एकड़ 445 पौधों तक का सघन वृक्षारोपण मॉडल.
• रखरखाव : वृक्षारोपण के प्रथम वर्ष से लेकर तीसरे वर्ष तक सुरक्षा और देखरेख के लिए प्रति पौधा लागत को महंगाई सूचकांक के अनुसार अद्यतन किया गया है.
नर्सरी और पौधशाला प्रबंधन
• स्थायी नर्सरी (क्षमता) : 50,000 से लेकर 1,00,000 पौधों की क्षमता वाली नर्सरियों के लिए बेड तैयार करने, खाद-मिट्टी के मिश्रण और पॉलीथीन बैग्स की खरीद पर प्रति यूनिट लागत तय की गई है.
• प्रति पौधा उत्पादन लागत : आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए प्रति पौधा नर्सरी लागत में 15% से 20% की वृद्धि की गई है ताकि गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार हो सकें.
जल संरक्षण संरचनाएं
• वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच : आकार के अनुसार प्रति मीटर खुदाई दर निर्धारित की गई है.
• डीप कंटूर ट्रेंच : ढलान वाले क्षेत्रों के लिए अधिक गहरी खाइयों की दरें तय की गई हैं.
• डोभा निर्माण : छोटे आकार के डोभा से लेकर बड़े जल संचय संरचनाओं के लिए प्रति घन मीटर खुदाई और मिट्टी हटाने का शुल्क (तय किया गया है.
सुरक्षात्मक कार्य
• चैन लिंक फेंसिंग : प्रति रनिंग मीटर की दर जिसमें एंगल आयरन पोस्ट और फेंसिंग जाल की गुणवत्ता के अनुसार मूल्य शामिल है.
• टी-गार्ड : लोहे के बने टी-गार्ड की स्थापना हेतु प्रति इकाई लागत, जो शहरी और सार्वजनिक क्षेत्रों में वृक्षारोपण के लिए अनिवार्य है.
अवक्रमित वनों का पुनर्वास
• घनत्व : पुनरुद्धार क्षेत्रों में 1,100 पौधे प्रति हेक्टेयर लगाने का मानक.
• तैयारी : प्रति हेक्टेयर झाड़ी सफाई और गड्ढों की खुदाई के लिए प्रति गड्ढा मजदूरी और तकनीकी श्रम लागत.


