Palamu: पलामू जिले के पड़वा इलाके के सिक्का गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा खुलासा किया है. सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने प्रेस वार्ता कर पुष्टि की कि इन मौतों की वजह कोई रहस्यमयी बीमारी नहीं, बल्कि एपिडेमिक ड्रॉप्सी थी. यह बीमारी परिवार द्वारा खाने में इस्तेमाल किए जा रहे मिलावटी सरसों तेल के कारण हुई. रांची स्थित स्टेट फूड लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट में मृतक परिवार के घर से जब्त सरसों तेल में ऑर्गेमोन मैक्सिकाना (सत्यानाशी/कटैला) के तेल की मिलावट की पुष्टि हुई है. परिवार करीब डेढ़ महीने से इस तेल का सेवन कर रहा था, जिससे उनके शरीर में सूजन आने लगी और 19 जून से 29 जून के बीच कुलदीप महतो, उनकी दो बेटियों, बहू और बेटे समेत पांच लोगों की मौत हो गई. वहीं कुलदीप महतो की पत्नी, एक अन्य बेटे और पोते का इलाज फिलहाल RIMS रांची में चल रहा है.
ड्रॉप्सी निकली मौतों की वजह, गांव में 195 घरों का सर्वे
शुरुआती दौर में अंधविश्वास के कारण परिवार झाड़-फूंक कराने लेस्लीगंज के पुरनाडीह चला गया था, जहां वे काफी समय तक राख खाते रहे. इसके चलते इलाज में देरी हुई. रिम्स के डॉक्टरों की आशंका के बाद स्वास्थ्य विभाग और फूड सेफ्टी टीम ने हरकत में आते हुए मृतक के घर से तेल, दाल, आटा और चावल के सैंपल लिए थे. पूछताछ में पता चला है कि परिवार ने करीब डेढ़ महीने पहले पास के ही एक गांव की तेल मिल से यह सरसों तेल निकलवाया था. सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि ड्रॉप्सी कोई संक्रामक बीमारी नहीं है, बल्कि एक प्रकार की विषाक्तता है जो एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती. इसका कोई निश्चित इलाज नहीं है, बल्कि लक्षणों के आधार पर उपचार किया जाता है. एहतियात के तौर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सिक्का गांव के 195 घरों का सर्वे कर 1,378 लोगों से स्वास्थ्य संबंधी पूछताछ की है और 56 लोगों के ब्लड सैंपल लिए हैं, जिनमें से किसी में भी इस बीमारी के लक्षण नहीं मिले हैं. प्रशासन अब संबंधित तेल मिल की जांच कर रहा है और ग्रामीणों को मिलावट के प्रति जागरूक किया जा रहा है.



