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हजारीबाग में इतिहास रचने को तैयार इस्कॉन: 16 जुलाई को देश के पहले ‘हाईटेक रिमोट कंट्रोल’ रथ पर नगर भ्रमण करेंगे भगवान जगन्नाथ

Hazaribagh : इस वर्ष हजारीबाग की पावन धरती पर आस्था, भक्ति और आधुनिक तकनीक का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलेगा,...

Set to make history in Hazaribagh

Hazaribagh : इस वर्ष हजारीबाग की पावन धरती पर आस्था, भक्ति और आधुनिक तकनीक का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलेगा, जिसकी चर्चा पूरे झारखंड में होने लगी है. अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) हजारीबाग के तत्वावधान में आगामी 16 जुलाई 2026 को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी. इस साल की रथ यात्रा कई मायनों में बेहद विशेष, डिजिटल और ऐतिहासिक होने जा रही है. हजारीबाग के इतिहास में पहली बार, महाप्रभु जगन्नाथ किसी सामान्य रथ पर नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक से सुसज्जित 40 फीट ऊंचे इलेक्ट्रॉनिक रिमोट कंट्रोल रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे. इस भव्य आयोजन को लेकर PTC चौक स्थित इस्कॉन कार्यालय में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया.

रिमोट दबाते ही कम हो जाएगी 40 फीट ऊंचे रथ की ऊंचाई

प्रेस वार्ता को इस्कॉन हजारीबाग के पूर्णकालिक डॉ. केशव आनंदन दास, रथ यात्रा संयोजक पतित तारण मुरारी दास तथा रथ यात्रा के कॉर्डिनेटर अमरनाथ वर्मा ने संयुक्त रूप से संबोधित किया. उन्होंने रथ की अनूठी खूबियों के बारे में बताते हुए कहा कि इस विशालकाय रथ की ऊंचाई लगभग 40 फीट होगी. शहर के कई संकीर्ण रास्तों, मोड़ों और ऊपर से गुजरने वाले बिजली के तारों व ओवरहेड केबलों को देखते हुए इसमें विशेष इलेक्ट्रॉनिक रिमोट कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है. आवश्यकता पड़ने पर रिमोट की सहायता से रथ की ऊंचाई को ऑन-स्पॉट कम किया जा सकेगा, जिससे शहर के विभिन्न व्यस्त और संकरे मार्गों से भी रथ का सुगम और सुरक्षित संचालन संभव हो सकेगा.

पुरी की पवित्र नीम की लकड़ी से बनी है महाप्रभु की दिव्य प्रतिमा

आयोजकों ने बताया कि इस हाईटेक रथ पर भगवान जगन्नाथ की वह अत्यंत दिव्य प्रतिमा विराजमान होगी, जिसे विशेष रूप से ओडिशा के पुरी से मंगाया गया है और यह पुरी की पवित्र पारंपरिक नीम की लकड़ी से निर्मित है. इसके साथ ही भगवान को विशेष पारंपरिक ‘ताहिया’ मुकुट से अलंकृत किया जाएगा, जो जगन्नाथ संस्कृति और सनातन धार्मिक परंपरा का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. इस बार की एक और सबसे बड़ी और खास बात यह होगी कि इस महाप्रभु के रथ को देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे IIT से जुड़े युवा इंजीनियर्स बेहद श्रद्धापूर्वक खींचेंगे.

PTC चौक से शुरू होगी यात्रा, इन रास्तों से गुजरेगा कारवां

इस्कॉन पदाधिकारियों के अनुसार, यह भव्य रथ यात्रा 16 जुलाई की सुबह PTC चौक स्थित इस्कॉन कार्यालय से शंखनाद और महाआरती के साथ प्रारंभ होगी. इसके बाद यह यात्रा SP कोठी, सर्किट हाउस, जिला परिषद चौक, पुराना बस स्टैंड और पीडब्ल्यूडी चौक होते हुए पुनः PTC चौक पहुंचेगी तथा SP कोठी के समीप इसका भव्य समापन होगा. पूरे यात्रा मार्ग में देश-विदेश के भक्तों द्वारा हरे कृष्णा महामंत्र का कीर्तन, पारंपरिक मृदंग-झांझ की थाप, भव्य जयघोष और पुष्पवर्षा आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगी.

17 से 24 जुलाई तक बहेगी आध्यात्मिक गंगा, बंटेगा महाप्रसाद

प्रेस वार्ता में जानकारी दी गई कि मुख्य रथ यात्रा के समापन के बाद भी उत्सव थमेगा नहीं. आगामी 17 जुलाई से 24 जुलाई तक प्रतिदिन भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया जाएगा. इस 8 दिवसीय महोत्सव के दौरान प्रतिदिन हरिनाम संकीर्तन, विशेष सत्संग, गौ सेवा, सामूहिक नामजाप, देश के प्रख्यात संतों द्वारा आध्यात्मिक प्रवचन तथा हजारों श्रद्धालुओं के बीच छप्पन भोग व महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा. आयोजकों ने कहा कि इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना, आपसी प्रेम, सद्भाव और भारतीय सनातन संस्कृति के प्रति युवा पीढ़ी की आस्था को मजबूत करना है. अंत में इस्कॉन के पदाधिकारियों ने हजारीबाग और पूरे कोयलांचल क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से भावुक अपील की है कि वे अपने परिवार, बच्चों और मित्रों के साथ इस रथ यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ की रथ की डोरी खींचें, उनका आशीर्वाद प्राप्त करें तथा इस ऐतिहासिक व आधुनिक आयोजन को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं.

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