Deoghar: देवघर जिला के जसीडीह स्थित एमपी माइनिंग एंड एनर्जी लिमिटेड के हेड–बिजनेस डेवलपमेंट आलोक कुमार वर्मा की गुमशुदगी अब एक बेहद रहस्यमयी और उलझी हुई कहानी बन चुकी है. पांच दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं और आलोक वर्मा का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिल पाया है. इस पूरे मामले में चतरा और देवघर पुलिस के बीच का घटनाक्रम, विरोधाभासी शिकायतें और अब सामने आया प्रेम प्रसंग का एंगल, जांच को और अधिक पेचीदा बना रहा है.
चतरा में मिली लावारिस कार, जसीडीह में मिली मोबाइल लोकेशन
मूल रूप से धनबाद के सदर थाना क्षेत्र स्थित एलआईजी-35 हाउसिंग कॉलोनी के निवासी आलोक कुमार वर्मा एक जुलाई से लापता हैं. परिजनों के मुताबिक, वह चतरा स्थित अपने ससुराल आए हुए थे और वहां से ‘लामटा मोड़’ जाने की बात कहकर निकले थे, लेकिन इसके बाद वह वापस नहीं लौटे. इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब उसी दिन (एक जुलाई को) चतरा के लावालौंग थाना क्षेत्र के जोगियाडीह-लीलाजन पुल के पास उनकी कार लावारिस हालत में बरामद की गई, लेकिन जब पुलिस के टेक्निकल सेल ने उनके मोबाइल का लोकेशन ट्रैक किया, तो वह चतरा के बजाय वहां से सैकड़ों किलोमीटर दूर देवघर के जसीडीह में मिला.

खुद दर्ज कराई अपहरण की शिकायत, फिर पत्नी ने दर्ज कराई गुमशुदगी
इस मामले में तब एक नया मोड़ आया जब यह पता चला कि आलोक वर्मा खुद जसीडीह थाना पहुंचे थे. वहां उन्होंने अपने साले अमन प्रधान के खिलाफ खुद के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी. दूसरी तरफ, घटनाक्रम में एक और मोड़ रविवार को आया, जब आलोक वर्मा की पत्नी श्वेता प्रधान ने चतरा के लावालौंग थाना में अपने पति की गुमशुदगी की एक नई प्राथमिकी दर्ज करा दी. अब स्थिति यह है कि एक तरफ पति ने साले पर अपहरण का आरोप लगाया है, तो दूसरी तरफ पत्नी ने पति के गायब होने का मामला दर्ज कराया है. इस उलझन के बीच आलोक वर्मा के परिजन मीडिया के सामने कुछ भी बोलने से पूरी तरह बच रहे हैं.
प्रेम प्रसंग का एंगल आने से जांच और उलझी
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब जसीडीह और चतरा पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई, तो इसमें एक महिला की एंट्री ने पूरे मामले को नया रुख दे दिया.
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