Hazaribagh: अखिल भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती सोमवार को हजारीबाग जिला भाजपा द्वारा बेहद हर्षोल्लास और गौरवमयी वातावरण में मनाई गई. शहर के सदर विधायक प्रदीप प्रसाद के कार्यालय सभागार में जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह की अध्यक्षता में भव्य कार्यकर्ता सम्मेलन सह जयंती समारोह का आयोजन किया गया. इस गौरवमयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व सांसद डॉ. रवींद्र कुमार राय विशेष रूप से उपस्थित हुए. कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने और ‘वंदे मातरम’ के ओजस्वी राष्ट्रगीत के उद्घोष के साथ हुआ, जबकि समापन राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से किया गया.
महज 33 वर्ष की उम्र में वीसी और देश के पहले उद्योग मंत्री बने डॉ. मुखर्जी
समारोह के मुख्य वक्ता डॉ. रवींद्र कुमार राय ने डॉ. मुखर्जी के विराट व्यक्तित्व और ऐतिहासिक संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 6 जुलाई 1901 को जन्मे डॉ. मुखर्जी एक असाधारण प्रतिभा के धनी, महान शिक्षाविद्, बैरिस्टर और प्रखर वक्ता थे. वे मात्र 33 वर्ष की सबसे कम उम्र में कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बने थे. स्वतंत्रता के बाद वे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री बने, लेकिन जब देश के स्वाभिमान और नीतियों से समझौता होने लगा, तो उन्होंने नेहरू-लियाकत समझौते के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल और कांग्रेस पार्टी से तत्काल इस्तीफा दे दिया था.

कश्मीर के पूर्ण विलय के लिए हंसते-हंसते न्योछावर कर दिए अपने प्राण
जयंती समारोह को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का यह दृढ़ संकल्प था कि एक स्वतंत्र देश में ‘दो प्रधान, दो संविधान और दो निशान’ कभी नहीं चलेंगे. उन्होंने इसके खिलाफ कश्मीर की धरती पर जाकर सीधे चुनौती दी. वहीं, सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने डॉ. मुखर्जी को नमन करते हुए कहा कि भारत माता के इस वीर सपूत ने कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए जेल की सलाखों के पीछे अपने प्राणों की आहुति दे दी. आज उनका वह ऐतिहासिक सपना और संकल्प धरातल पर पूरी तरह साकार हो चुका है.


