बजट सत्रः शक्ति प्रदर्शन कार्यों से हो न कि शब्दों से- हफीजुल अंसारी

रांची: विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के 12वें दिन जल संसाधन विभाग के बजट पर अपनी बात रखते हुए मंत्री हफीजुल...

रांची: विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के 12वें दिन जल संसाधन विभाग के बजट पर अपनी बात रखते हुए मंत्री हफीजुल अंसारी ने कहा कि शक्ति का प्रदर्शन कार्यों से होना चाहिए, शब्दों से नहीं. उन्होंने कहा कि योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए फील्ड में मेहनत भी करनी होगी.

उन्होंने कहा कि केंद्र से पर्याप्त राशि नहीं मिलने के कारण बड़ी योजनाओं को पूरा करना राज्य सरकार के लिए कठिन हो रहा है. पहले केंद्र सरकार किसी योजना में 90 प्रतिशत राशि देती थी और राज्य सरकार 10 प्रतिशत वहन करती थी, लेकिन अब केंद्र सिर्फ 19 प्रतिशत राशि दे रहा है, जबकि राज्य सरकार को 81 प्रतिशत राशि वहन करनी पड़ रही है, जिससे परेशानी बढ़ गई है.

पांच साल में पलाही डैम को खोज निकालेंगे

सत्येंद्र तिवारी के सवाल पर मंत्री हफीजुल अंसारी ने कहा कि पांच साल में पलाही डैम को खोज कर अपने घर पहुंचा देंगे. उन्होंने कहा कि जो काम 50 साल में नहीं हुआ, वह पांच साल में पूरा होगा. उन्होंने बताया कि पीरडांड मेगा लिफ्ट परियोजना के तहत 130 तालाबों का पानी स्टॉक किया जाएगा.

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अधूरी योजनाओं की समीक्षा की मांग

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अधूरी योजनाओं की समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि तिसरी की चरकीपहाड़ी योजना वर्ष 2018 में शुरू हुई थी. 2.44 करोड़ रुपये की इस योजना में 1.48 करोड़ रुपये का भुगतान भी हो चुका है, लेकिन योजना अब तक पूरी नहीं हो पाई है.

वहीं प्रदीप यादव ने कहा कि पानी की उपलब्धता का सही आकलन होना चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल विधायकों पर जिम्मेदारी डालने से काम नहीं चलेगा, जहां जरूरत है वहां समाधान तलाशना होगा.

स्वर्णरेखा परियोजना पर उठे सवाल

सरयू राय ने कहा कि अब तक स्वर्णरेखा परियोजना का मांग पत्र और ऑडिट रिपोर्ट केंद्र सरकार को नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि आज जल संसाधन विभाग का बजट है, लेकिन सिंचाई विभाग का बजट थमा दिया गया है. बजट पुस्तिका में जो भूमिका पिछले वर्ष दी गई थी, वही इस वर्ष भी दोहरा दी गई है.

उन्होंने कहा कि पूरे बजट का एक ही फॉर्मेट है, जबकि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि राज्य में कितने डैम हैं और सिंचाई के पानी का कितना उपयोग हो रहा है.

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सिंचाई सुविधा और जलाशय योजनाओं पर भी चर्चा

मनोज यादव ने कहा कि आजादी के बाद से अब तक राज्य में केवल 40 प्रतिशत ही सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो पाई है. उन्होंने कहा कि स्वर्णरेखा परियोजना सफेद हाथी बनकर रह गई है और पुनाशी जलाशय योजना भी अब तक पूरी नहीं हो सकी है. उन्होंने लिफ्ट एरिगेशन के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही.

वहीं जर्मादन पासवान ने कहा कि जहां कच्चा बांध है वहां पानी है, जबकि जहां पक्का बांध है वहां पानी नहीं है. उन्होंने कहा कि जो बांध टूट गए हैं उनकी जांच कराई जानी चाहिए और उनकी मरम्मत भी कराई जानी चाहिए.

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