Ranchi: मानसून ने जैसे रांची नगर निगम की सारी पोल खोल दी है. शहर में बारिश शुरू होते ही सड़कें तालाब बन गईं, नाले उबल पड़े, गंदगी फैल गई और जनता सड़कों पर फंस गई. वजह एकदम साफ है. नगर निगम के पास फंड का नामोनिशान नहीं. सैकड़ों रोड, नाला, ड्रेनेज और निर्माण कार्य ठप पड़े हैं.मेयर-सरकार की लड़ाई में आम रांचीवासी रोजाना सजा भुगत रहे हैं. निगम की हालत अब चरमराहट की कगार पर पहुंच चुकी है. मेयर खुलेआम राज्य सरकार को दोषी ठहरा रही हैं कि फंड नहीं दे रही. पार्षद चीख-चीखकर कह रहे हैं कि उनके वार्ड में कोई काम नहीं हो पा रहा, न उनकी सैलरी आ रही है. निगम कर्मचारी भी बिना वेतन के काम करने को मजबूर. लेकिन सवाल ये है — इतना पैसा टैक्स के नाम पर लूटकर कहां गायब कर दिया गया?
टैक्स वसूली में शेर, विकास में बिल्ली
रांची नगर निगम टैक्स वसूली में पूरे राज्य का चैंपियन है, लेकिन विकास कार्यों में सबसे बड़ा फिसड्डी. जनता से प्रॉपर्टी टैक्स, पानी टैक्स, दुकान टैक्स — हर तरह का पैसा बेदर्दी से वसूला जा रहा है, मगर उसी पैसे से शहर का एक इंच विकास नहीं हो पा रहा. ये साफ लूट है. पार्षदों में आक्रोश फूट पड़ा है. वार्ड में न सड़क बन रही, न नाला साफ हो रहा. जनता हमें गालियां दे रही है। हम क्या जवाब दें? सिर्फ फंड का रोना रो रहे हैं सब.

मेयर की सिर्फ मीडिया में बयानबाजी
सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि मेयर हर छोटे-मोटे नाले या गली के उद्घाटन में पहुंचकर रिबन काट रही हैं. कई पार्षदों ने खुलकर आरोप लगाया है कि मेयर पद की गरिमा को ताक पर रखकर फोटो सेशन चला रही हैं. उन्होंने पहले भी इस पर आवाज उठाई थी, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ाजब बड़े विकास कार्य फंड की कमी से रुके हुए हैं, तो मेयर छोटे-मोटे कार्यक्रमों में जनता के बीच “सक्रिय” दिखने की कोशिश कर रही हैं. पार्षदों का सवाल जायज है — मेयर पद इतना सस्ता हो गया है क्या?गरिमा कहां गई? बड़े काम नहीं हो रहे तो छोटे-मोटे करके जनता को बेवकूफ बनाया जा रहा है?
बारिश भी सजा देगी
अब सवाल ये है कि मेयर और राज्य सरकार के बीच यह फंड वाली जंग कब खत्म होगी? इस बारिश में रांची की जनता को और कितनी परेशानी झेलनी पड़ेगी? जलभराव, गड्ढे, मच्छर, बीमारियां — सब बढ़ने वाले हैं.
नगर निगम से सीधा सवाल:
– टैक्स का पैसा कहां गया?
– विकास कार्य कब शुरू होंगे?
– या फिर सिर्फ बहाने और फोटो सेशन ही चलता रहेगा?
रांची नगर निगम अब जनता की जेब काटने वाली मशीन बनकर रह गया है, विकास करने वाली संस्था नहीं. अगर जल्दी फंड नहीं आया और काम नहीं शुरू हुए, तो यह बारिश रांचीवासियों के लिए न सिर्फ परेशानी, बल्कि सिस्टम की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत बनकर रहेगी.


