Hazaribagh: सदर अस्पताल के डे-केयर यूनिट में पिछले करीब दो महीने से हीमोफिलिया मरीजों के लिए आवश्यक जीवनरक्षक दवा फैक्टर-8 और फैक्टर-9 उपलब्ध नहीं होने का मामला सामने आया है. दवा की अनुपलब्धता के कारण जिले के करीब 40 हीमोफिलिया मरीज गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं. इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की गई है.
जीवनरक्षक दवा के बिना बढ़ा खतरा
जानकारी के अनुसार, हीमोफिलिया एक गंभीर आनुवंशिक रक्तस्राव संबंधी बीमारी है, जिसमें शरीर में खून का थक्का बनने की क्षमता बेहद कम हो जाती है. ऐसे मरीजों के लिए फैक्टर-8 और फैक्टर-9 दवा किसी जीवनरक्षक उपचार से कम नहीं है. समय पर दवा नहीं मिलने पर मामूली चोट भी गंभीर रक्तस्राव का कारण बन सकती है और मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है.

दो महीने से खाली है डे-केयर यूनिट
बताया जा रहा है कि हजारीबाग सदर अस्पताल के डे-केयर यूनिट में पिछले करीब दो महीने से फैक्टर-8 और फैक्टर-9 का स्टॉक समाप्त है. इससे नियमित उपचार पर निर्भर मरीजों और उनके परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. कई मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों या अन्य जिलों का रुख करना पड़ रहा है, जहां दवाएं काफी महंगी हैं.
मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
मामले को लेकर सांसद के मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील है कि वे इस गंभीर समस्या का तत्काल संज्ञान लें और हजारीबाग सदर अस्पताल में फैक्टर-8 एवं फैक्टर-9 की शीघ्र आपूर्ति सुनिश्चित कराएं, ताकि जरूरतमंद मरीजों का उपचार बाधित न हो.
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
लगातार दो महीने तक जीवनरक्षक दवा उपलब्ध नहीं रहने से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यदि जल्द दवा उपलब्ध नहीं कराई गई तो कई मरीजों की स्थिति गंभीर हो सकती है.
मरीजों की मांग
हीमोफिलिया मरीजों और उनके परिजनों ने सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि हजारीबाग सदर अस्पताल में फैक्टर-8 और फैक्टर-9 की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को इलाज के अभाव में परेशानी का सामना न करना पड़े.
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