Ranchi: ओरमांझी स्थित तरंगनी लीकर्स प्राइवेट लिमिटेड के बॉटलिंग प्लांट में अवैध शराब मिलने के मामले की जांच तेज हो गई है. सहायक उत्पाद आयुक्त, रांची ने प्लांट में बचे हुए शराब के स्टॉक की जांच और उसके उठाव को लेकर उपायुक्त को पत्र भेजा है. सील किए गए प्लांट को अब मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में खोला जाएगा. बता दें, कि 30 जून को उत्पाद विभाग ने छापेमारी के दौरान फैक्ट्री में अवैध शराब मिलने के बाद प्लांट को सील कर दिया था. इसके बाद से परिसर में किसी के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.
उत्पाद विभाग ने मांगा स्पष्टीकरण
इस मामले में उत्पाद विभाग ने फैक्ट्री के बाउंड ऑफिसर रूपेश कुमार, तरंगनी लीकर्स प्राइवेट लिमिटेड और बॉटलिंग से जुड़ी कंपनी रेडिको खेतान लिमिटेड से स्पष्टीकरण मांगा है. तीनों पक्षों को जवाब देने के लिए बुधवार को अंतिम दिन निर्धारित किया गया है. प्राप्त जवाबों के आधार पर आगे की जांच की जाएगी और उसके बाद उपायुक्त द्वारा कंपनी के लाइसेंस को रद्द करने या बरकरार रखने पर निर्णय लिया जाएगा.

लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन, कर चोरी की आशंका
नियमों के अनुसार किसी भी बॉटलिंग प्लांट को जिस राज्य का लाइसेंस मिलता है, वह केवल उसी राज्य के लिए और उसके आबकारी नियमों के तहत ही शराब का उत्पादन कर सकता है. तरंगनी लीकर्स को केवल झारखंड के लिए बॉटलिंग की अनुमति प्राप्त थी. इसके बावजूद फैक्ट्री में दिल्ली और उत्तर प्रदेश के लेबल वाली शराब का मिलना गंभीर अनियमितता की ओर संकेत करता है. प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है, कि झारखंड के कोटे के स्पिरिट का उपयोग कर अन्य राज्यों के लिए शराब तैयार की जा रही थी, जिसे अवैध रूप से खपाया जा रहा था. इसे अंतरराज्यीय तस्करी और कर चोरी से जुड़ा बड़ा आर्थिक अपराध माना जा रहा है.
इन ब्रांड्स की अवैध शराब बरामद
छापेमारी के दौरान विभिन्न ब्रांड की शराब बरामद की गई, जिनमें शामिल हैं:
- आफ्टर डार्क ब्लू रेयर ग्रेन व्हिस्की (180 एमएल): कुल 218 पेटी, जिन पर “सिर्फ उत्तर प्रदेश में बिक्री के लिए” अंकित था (बैच जून 2026).
- 8 PM प्रीमियम ब्लैक सुपीरियर व्हिस्की (180 एमएल): 07 पेटी, जिन पर भी उत्तर प्रदेश में बिक्री का उल्लेख था.
- रॉयलसन गोल्ड व्हिस्की (375 एमएल): 22 पेटी, जिन पर “सिर्फ दिल्ली में बिक्री के लिए” अंकित था.
- रॉयलसन गोल्ड व्हिस्की (750 एमएल): 56 पेटी, जिन पर दिल्ली में बिक्री का लेबल लगा हुआ था.
उत्पाद विभाग अब पूरे मामले की गहन जांच में जुटा है. जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कड़ी कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है.
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