Chatra : चतरा–सिमरिया मुख्य मार्ग स्थित देल्हो घाटी में सड़क दुर्घटना के बाद भड़का जन-आक्रोश आखिरकार 60 घंटे बाद शनिवार देर रात 12 बजे शांत हो गया. सीआरपीएफ CRPF जवान लक्ष्मण कुमार यादव की मौत के विरोध में जारी यह जोरदार आंदोलन प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच हुई एक मैराथन बैठक के बाद समाप्त हुआ. जिला प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई लंबी वार्ता में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी. इसके बाद आंदोलनकारियों ने आधिकारिक रूप से धरना समाप्त करने की घोषणा की. इस समझौते के साथ ही पिछले तीन दिनों से जारी गतिरोध पूरी तरह खत्म हो गया है और मार्ग पर सामान्य वाहनों का परिचालन फिर से बहाल कर दिया गया है.
प्रशासन की ओर से त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया गया
- प्रशासन ने मृतक जवान के परिजनों को 10 लाख रूपये का मुआवजा देने का लिखित आश्वासन दिया है. सिमरिया अंचल अधिकारी गौरव कुमार राय ने स्पष्ट किया कि सोमवार तक यह मुआवजा राशि पीड़ित परिवार को उपलब्ध करा दी जाएगी.
- समझौते का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बिंदु भारी वाहनों के परिचालन से जुड़ा है. निर्णय लिया गया है कि जब तक उच्च स्तरीय बैठक में कोई अंतिम और ठोस नीति नहीं बन जाती, तब तक चतरा जिले के किसी भी मार्ग पर भारी मालवाहक और विशेष रूप से कोयला वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह से रोक रहेगी. प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट गाइडलाइन जारी होने के बाद ही इन्हें दोबारा सड़क पर उतरने की अनुमति मिलेगी.
- इस महत्वपूर्ण बैठक में सिमरिया अंचल अधिकारी गौरव कुमार राय के साथ सिमरिया थाना प्रभारी अमित कुमार गुप्ता भी मुख्य रूप से मौजूद रहे और ग्रामीणों को निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया.
आंदोलन को मिला था व्यापक राजनीतिक और जन समर्थन
बता दें कि यह आंदोलन महज ग्रामीणों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हर वर्ग का समर्थन मिला. पिछले तीन दिनों से भारी संख्या में ग्रामीण सड़क पर डटे हुए थे.
