रांची: सुबह छात्रा गई स्कूल, दोपहर में लौटी तो उजड़ चुका था आशियाना, मलबे में भीग रहे लक्ष्मी के वैज्ञानिक बनने के सपने

Ranchi: एक तरफ देश में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और गरीबों के कल्याण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ...

Ranchi: एक तरफ देश में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और गरीबों के कल्याण के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक संवेदनहीनता की एक ऐसी दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को सड़क पर ला खड़ा किया है. मामला मोरहाबादी के रजिस्ट्री ऑफिस के सामने का है, जहां नगर निगम की बुलडोजर कार्रवाई ने न सिर्फ एक गरीब का आशियाना उजाड़ दिया, बल्कि एक होनहार छात्रा के भविष्य पर भी गहरा सवालिया निशान लगा दिया है.

घर से गई थी स्कूल, लौटी तो मिला सिर्फ मलबा:

उर्सलाइन स्कूल की दसवीं कक्षा की छात्रा लक्ष्मी मुंडा रोज़ की तरह आज सुबह भी अपने सुनहरे भविष्य के सपने लेकर स्कूल पढ़ने गई थी. जब वह घर से निकली थी, तो उसका छोटा सा आशियाना और परिवार की आजीविका का साधन उनकी छोटी सी दुकान पूरी तरह असुरक्षित थे. लक्ष्मी को क्या मालूम था कि जिस वक्त वह स्कूल की बेंच पर बैठकर अपने सुनहरे कल की इबारत लिख रही होगी, ठीक उसी वक्त नगर निगम का बुलडोजर उसके आज को जमींदोज कर रहा होगा. दोपहर में जब वह पढ़ाई खत्म करके वापस लौटी, तो वहां का नजारा देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. जिस जगह सुबह तक उसका घर था, वहां अब सिर्फ ईंट, सीमेंट और मलबे का ढेर बिखरा पड़ा था. नगर निगम की टीम ने उसके घर और दुकान दोनों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था.

बारिश में भीग रही हैं किताबें और वैज्ञानिक बनने का सपना:

झारखंड में लगातार हो रही तेज बारिश के बीच अब यह पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है. इस तबाही में सबसे दर्दनाक मंजर तब देखने को मिला जब लक्ष्मी मलबे के बीच से अपनी भीगी हुई किताबों और कॉपियों को समेटती नजर आई.

मां सदमे में, बिना नोटिस कार्रवाई का आरोप:

इस अचानक आई विपत्ति ने लक्ष्मी की मां, सरिता मुंडा को गहरे सदमे में डाल दिया है. वह अपने उजड़े हुए संसार को देख-देखकर बार-बार बेहोश हो जा रही हैं. रोते हुए सरिता ने बताया. मेरी मां भी मोरहाबादी के इसी रजिस्ट्री ऑफिस के सामने रहती थीं. मेरी बेटी लक्ष्मी का जन्म भी इसी जगह हुआ. यही हमारा घर था और यही हमारी पूरी दुनिया थी.

कोई नोटिस नहीं मिला:

परिवार का आरोप है कि नगर निगम द्वारा उन्हें घर खाली करने या दुकान हटाने का कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया. अचानक आई टीम ने बिना कोई मौका दिए सब कुछ तोड़ दिया. सरिता कहती हैं कि उनके पास इसके अलावा रहने के लिए कोई दूसरी जमीन नहीं है. इस कड़कड़ाती बारिश और रात के अंधेरे में वह अपने बच्चों को लेकर कहां जाएं? कल से उनके घर का चूल्हा कैसे जलेगा और रोजी-रोटी कैसे चलेगी? इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है.

व्यवस्था की क्रूरता पर समाज से गुहार:

यह घटना सिर्फ एक कच्चे मकान या दुकान के टूटने की कहानी नहीं है. यह कहानी है एक मां के सालों के संघर्ष के बिखरने की, और एक मेधावी बेटी के हौसलों के टूटने की. इस कड़कड़ाती बारिश में मलबे के ढेर पर बैठा यह परिवार आज सरकार, रांची नगर निगम और समाज के संवेदनशील लोगों की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है.

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