Ranchi: झारखंड में इस बार मानसून का मिजाज काफी सुस्त और निराशाजनक बना हुआ है. राज्य के किसान और आम जनमानस अच्छी बारिश की उम्मीद में आसमान की ओर ताक रहे हैं, लेकिन मौसम विभाग के आंकड़े के अनुसार राज्य के सभी 24 जिलों में मानसून की बारिश अपने सामान्य औसत से काफी नीचे दर्ज की गई है. राज्य में कुल सामान्य वर्षापात 307 मिलीमीटर होना चाहिए था, लेकिन अब तक मात्र 191.4 मिलीमीटर ही बारिश दर्ज की गई है. यानी राज्य में सामान्य से 38 प्रतिशत कम बारिश हुई है.
सबसे खराब स्थिति वाले जिले:
बारिश की कमी से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में गढ़वा शीर्ष पर है, जहां सामान्य से 77 प्रतिशत कम बारिश हुई है. इसके बाद चतरा में 67 प्रतिशत, पाकुड़ में 61 प्रतिशत और कोडरमा में 60 प्रतिशत की भारी कमी देखी गई है. गोड्डा और देवघर में भी स्थिति खराब है, जहां सामान्य से क्रमशः 50 और 53 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है.
मध्यम स्थिति वाले जिले
राज्य के कई अन्य जिलों में भी वर्षा की भारी कमी है. हजारीबाग में 48%, लातेहार में 47%, पलामू में 45%, साहिबगंज में 45%, खूंटी में 44%, लोहरदगा में 44%, गिरिडीह में 43%, पूर्वी-सिंहभूम में 42%, बोकारो में 41% और रामगढ़ में 39% बारिश कम हुई है. पश्चिमी-सिंहभूम में 24 प्रतिशत कम बारिश हुई है. धनबाद और गुमला में भी बारिश की स्थिति क्रमशः 31 और 34 प्रतिशत कम रही है. सिमडेगा में 15%, सरायकेला-खरसावां में 16%, रांची में 17% और दुमका में 18% फीसदी बारिश कम हुई है.
खेती-बारी पर संकट के बादल
झारखंड की अधिकांश खेती मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है. धान की बुवाई का यह पीक सीजन है, लेकिन कम बारिश के कारन संकट के बादल मंडरा रहे हैं. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून ट्रफ रेखा की स्थिति और बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्रों का न बनना इस सूखे जैसे हालात का मुख्य कारण है. फिलहाल, राज्य को अभी भी झमाझम बारिश का इंतजार है ताकि फसलों को बचाया जा सके और जल स्रोतों का स्तर सुधारा जा सके.
